योगेश कौशिक, अलीगढ़। इगलास क्षेत्र में जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर अलीगढ़-मथुरा मार्ग पर गांव सहारा खुर्द व पाताल खेडिया के मध्य गुप्ततीर्थ स्थल है। यहां शिव पुत्र कार्तिकेय द्वारा स्थापित तीन शिवलिंग हैं। माना जाता है यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद भोलेनाथ पूरी करते हैं। इस लिए यह भूमि शिव भक्तों की आस्था को केंद्र है।

मंदिर का इतिहास

गांव सहारा खुर्द व पाताल खेडि़या के मध्य कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर, कपालेश्वर के मंदिर दिखाई पड़ते है। इस मंदिर पर दूर-दराज से आकर शिवभक्त मन्नतें मांगते हैं। मंदिर संचालक मोहनगिरी महाराज बताते हैं कि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने ताडकासुर नामक राक्षस का वध यहीं किया था। ताडकासुर शिवभक्त था। इसके प्रयाश्चति के लिए कार्तिकेय ने विश्वकर्मा से तीन विशुद्ध शिवलिंगों का निर्माण कराया। कार्तिकेय ने कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर, कपालेश्वर नामक तीन शिवलिंगों की स्थापना की। इसका वर्णन शिवपुराण, स्कंदपुराण, भागवत पुराण व विश्वकर्मा पुराण में मिलता है। एक श्राप के कारण इसे गुप्ततीर्थ स्थल कहा जाता है।

मंदिर की विशेषता

तीनों शिवलिंग जमीन से निकले हुए है, इनकी कोई थाह नहीं है। प्रत्येक शिवलिंग की ऊचाई 4-5 फुट है। मंदिर के समीप ही पार्वती सरोबर है। संपूर्ण भारत में भै माता का यहां एक मात्र मंदिर यही है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को दर्शन के लिए लाइन लगानी पड़ती है। मंदिर पर धार्मिक अनुष्ठान के साथ मेले का आयोजन होता है। पूजा-अर्चना करने के लिए दूर दराज से आए दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।

इनका कहना है

श्राप के कारण यह गुप्त तीर्थस्थल है, इसका वर्णन पुराणों में है। शिव पुत्र कार्तिके द्वारा स्थापित शिवलिंगों के दर्शन करने से मन प्रसन्न हो जाता है। यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं।

मोहनगिरी महाराज, मंदिर संचालक

यह प्राचीन मंदिर है। मंदिर पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं। मंदिर की ख्याति दूर दराज क्षेत्रों तक फैली हुई है। मंदिर पर दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रहती है।

संजय चौधरी, शिव भक्त

Edited By: Anil Kushwaha