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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 01, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एसडीएम ने डीएपी की कालाबाजारी करते व्यापारी पकड़ा, ट्रक समेत पुलिस को सौंपा

By JagranEdited By:
Published: Mon, 01 Nov 2021 01:22 AM (IST)

खैर में रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे एसडीएम केबी सिंह ने मुखबिर की सूचना पर गुप्ता खाद बीज भंडार ...और पढ़ें

एसडीएम ने डीएपी की कालाबाजारी करते व्यापारी पकड़ा, ट्रक समेत पुलिस को सौंपा
एसडीएम ने डीएपी की कालाबाजारी करते व्यापारी पकड़ा, ट्रक समेत पुलिस को सौंपा

अलीगढ़ : खैर में रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे एसडीएम केबी सिंह ने मुखबिर की सूचना पर गुप्ता खाद बीज भंडार पर छापा मारा। यहां स्टाक में जमा किए बिना रात में ही खाद ब्लैक में उतर रहा था। पुलिस ने ट्रक जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया है।

खैर की अनाज मंडी की एक खाद फर्म से डीएपी के 300 बैग अवैध रूप से भरकर ट्रक आया था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर अलीगढ़ पलवल रोड से ट्रक को पकड़ा। छानबीन की तो कालाबाजारी का मामला सामने आने पर ट्रक को थाने ले आए। खाद को कब्जे में लेते हुए चालक व दुकानदार को हिरासत में ले लिया है। एसडीएम ने बताया कि रविवार को एक ट्रक में 600 बैग डीएपी खैर के लिए आया था। 200 बैग गांव उसरम में एक दुकानदार को उतार कर ट्रक मंडी के सामने एक दुकानदार के यहां खाद उतारनी थी। यहा खाद स्टाक में जमा करके सोमवार को नियमानुसार किसानों को बंटना था, लेकिन दुकानदार ने बिना स्टाक में जमा किए कस्बा की केबीसी कालोनी में ट्रक लाकर गुप्त रूप से डीएपी की कालाबाजारी शुरू कर दी। सूचना पर वे थाना प्रभारी के साथ पहुंचे तो वहां भगदड़ मच गई। तब तक कई लोग खाद लेकर के फरार हो गए। मौके से 300 बैग सहित ट्रक ड्राइवर व गुप्ता खाद भंडार के मालिक को पुलिस के हवाले करते हुए जिला कृषि अधिकारी को सूचना दी। उनके द्वारा खाद की कालाबाजारी करने वाले दुकानदार के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

बता दें कि कस्बा में सहकारी समितियों पर डीएपी खाद की कमी है। यही कारण है कि इन समितियों पर एक आधार कार्ड पर पांच बोरी खाद मिल रहा है। इसका नियम हर किसान के लिए है। यदि किसी किसान के पास 50 बीघा जमीन है उसको भी एक आधार कार्ड पर पांच बोरी खाद मिलेगा, जिसके पास पांच बीघा खेत है उसको भी एक आधार कार्ड पर पांच बोरी ही मिलेगी। जिस व्यक्ति के पास यदि खेत नहीं है तो उसे भी एक आधार कार्ड पर पांच बोरी खाद मिल रहा है। सहकारी समितियों पर डीएपी की कमी होने से किसानों को व्यापारियों से डीएपी खरीदनी पड़ रही है। व्यापारी भी डीएपी की कालाबाजारी कर रहे हैं। डीएपी की एक बोरी 1200 रुपये की है जबकि व्यापारी किसानों को वही बोरी 1300 या फिर 1350 रुपये की खुलेआम बिक रही है। इस प्रकार किसान को एक बोरी खरीदने के लिये 150 से 200 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं। मरता क्या न करता की तर्ज पर किसानों को ब्लैक में इस समय डीएपी खरीदनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि सहकारी समितियों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध होती तो किसान समितियों से ही खाद खरीदते लेकिन जब समितियों पर कमी है तो फिर किसानों को उसको ब्लैक में खरीदना ही पड़ रहा है। यदि सरसों व आलू की बुवाई के साथ यदि डीएपी की बुवाई नहीं होगी तो फिर उनकी फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि किसान हर कीमत पर डीएपी खाद खरीदने के लिए मजबूर हैं। समाचार लिखे जाने तक व्यापारी के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखा गया।