अलीगढ़ (जेएनएन) : ग्राम पंचायतों के चुनाव अगले साल प्रस्तावित है। जैसे-जैसे यह समय नजदीक आ रहा है, हवा भी बदलने लगी है। चार साल तक गांव के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रधान अब विरोधियों को बेईमान दिखने लगे हैं। प्रधानों के खिलाफ शिकायतों का ग्राफ बढऩे लगा है। पंचायती राज विभाग हर माह करीब 30 प्रधानों की जांच करा रहा है। कुछ गांवों में घपले हैं तो कुछ आरोप बेबुनियाद।

मनरेगा के लिए अलग से मिलती धनराशि

जिले में 12 ब्लॉकों में 887 ग्राम पंचायतें हैं। सरकार इन्हें हर साल राज्य वित्त व 14वें वित्त आयोग से 10 से 20 लाख रुपये तक विकास के लिए दे रही है। इससे सड़क, नाली, खड़ंजा, हैंडपंप, लाइट समेत अन्य विकास कार्य कराए जाते हैैं। मनरेगा व शौचालय निर्माण की धनराशि अलग से मिलती है। चार साल में हर पंचायत को औसतन 80 लाख से एक करोड़ तक मिल चुके हैैं। बड़ी ग्राम पंचायतों में यह आंकड़ा दो करोड़ तक का है। 

एक-दो जांच : विकास कार्यों को लेकर प्रधानों पर आरोप-प्रत्यारोप आम बात हैं, लेकिन जांच कुछ ही प्रधानों की होती है। पंचायती राज विभाग से भी हर महीने एक-दो जांच हो पाती है। पिछले चार साल में करीब 50 जांच हुई हैं। अगले साल प्रधानी के चुनाव होने हैं। प्रधानों के खिलाफ शिकायतें भी बढऩे लगी हैं। हर महीने करीब 50 प्रधानों की शिकायतें आ रही हैं। 25 से 30 की जांच हर महीने विभाग द्वारा हो रही हैं। इनमें अधिकांश शिकायतें फर्जी व साजिशन निकल रही हैं। एक-दो मामले में ही कमियां मिल रही हैं। 

शपथपत्र पर ही जांच

पंचायत निधि से होने वाले विकास कायों की जांच के नियम सरकार ने बदल दिए हैैं। अब शपथपत्र पर मिलने वाली शिकायतों की ही जांच होती है। कोई फर्जी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का भी नियम है। 

 पूछ रहे कुशलक्षेप

प्रधानी के लिए गांवों में दावेदारों ने सक्रियता बढ़ा दी है। अपनी अमीरी की धुन में रहने वाले लोग आम आदमी से कुशलक्षेप पूछ रहे हैं। 

Posted By: Sandeep Saxena

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