हाथरस : हाथरस जंक्शन से डेढ़ किलोमीटर दूर 16 राज्यों के दो हजार कुलियों ने ट्रैक जाम कर दिया था। वे पक्की नौकरी की माग कर रहे थे। इनकी पहचान में पुलिस जुटी हुई है। इनके खिलाफ दो मामले दर्ज हुए हैं। एक आरपीएफ में और दूसरा हाथरस जंक्शन कोतवाली में। इनमें नौ कुलियों को नामजद किया गया है। अन्यों की पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज व फोटो खंगाल रही है।

एक सप्ताह से जुट रही थी कुलियों की भीड़

हाथरस जंक्शन स्टेशन पर रेलवे मंडल इलाहाबाद के हजारों कुलियों के आंदोलन को लेकर खुफिया तंत्र ही विफल रहा, जबकि इसकी जानकारी प्रधानमंत्री से लेकर रेलमंत्री तक को देने के साथ ही एक सप्ताह से कस्बे में 16 राज्यों को कुली जमा हो रहे थे। हजारों कुली एक जगह जमा हो गए और अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी।

सुबह गुजरती हैं वीआईपी ट्रेन

आल इंडिया रेलवे लाल वर्दी कुली यूनियन के राष्ट्रीय प्रधान कश्मीरी लाल के मुताबिक इस चक्का जाम आंदोलन को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, रेल मंत्री, रेल राज्यमंत्री समेत तमाम अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित किया था मगर हाथरस जंक्शन स्टेशन के पास आंदोलन की बात गुप्त रखी गई थी। यह जगह इस लिए ठीक थी, क्योंकि यहां आंदोलन शुरू होने के बाद पुलिस-प्रशासनिक और अधिकारियों को पहुंचने में काफी देर लगती। इसे प्रभावी बनाने के लिए सुबह सात बजे का समय तय किया गया चूंकि इसी समय शताब्दी, राजधानी समेत ज्यादातर वीआइपी ट्रेनें दिल्ली-हावड़ा ट्रैक पर गुजरती हैं।

धर्मशाला, स्टेशन, मंदिरों पर रुके थे

आंदोलन को वृहद बनाने के लिए महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, एमपी, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ सहित 16 राज्यों के कुलियों को एकत्रित किया गया था। जो लोग दूर से आने थे वह कुछ दिन पहले यहां पहुंच गए थे और धर्मशाला, मंदिरों आदि जगहों पर रुके हुए थे। आसपास के जिलों के सैकड़ों कुली देर रात और सुबह के समय ट्रेनों के जरिए हाथरस जंक्शन पर पहुंचे और उन्होंने स्टेशन पर ही रात बिताई।

कुलियों ने पांच घंटे रोका था दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक

इलाहाबाद रेलवे मंडल के करीब चार हजार कुलियों ने शुक्रवार को उत्तर मध्य रेलवे के हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन के निकट दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक रोक कर अधिकारियों के होश उड़ा दिए। यहां आंदोलन की किसी को भनक तक नहीं लगने दी। स्टेशन पर एकत्रित हुए और लाल वर्दी पहनकर किलोमीटर दूर गांव धौरपुर पर ट्रैक बाधित कर दिया। इस दौरान अप-डाउन रूट पर राजधानी, शताब्दी एक्सप्रेस समेत दो दर्जन ट्रेनों के पहिए थम गए। कालका, महानंदा, सीमांचल, बरेली पैसेंजर सहित आधा दर्जन ट्रेनें अलीगढ़ के स्टेशन पर खड़ी रहीं। कई ट्रेनों को आसपास के स्टेशनों पर रोक दिया गया। इसके चलते यात्रियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। करीब पांच घंटे बाद वार्ता पर सहमति बनने पर ट्रैक खाली किया। इन्हें 11 सितंबर को डीआरएम से वार्ता का आश्वासन मिला है।

अरसे से पक्की नौकरी मांग रहे हैं कुली

आंदोलन ऑल इंडिया रेलवे लाल वर्दी कुली यूनियन के आह्वान पर किया गया। यूनियन से जुड़े कुली लंबे अरसे से पक्की नौकरी सहित कई मांग कर रहे हैं। पिछले दिनों आंदोलन का निर्णय लिया गया, लेकिन स्थान किसी को नहीं पता नहीं लगने दिया। शुक्रवार की सुबह अचानक कुलियों के ट्रैक पर पहुंचने से हड़कंप मच गया। रेलवे के अधिकारियों के अलावा हाथरस के डीएम डॉ. रामशंकर मौर्य, एसपी जयप्रकाश मौके पर पहुंच गए। चार जिलों की पुलिस भी बुलाई गई। समझाने के बाद भी कुली अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना था कि तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने 2008 में कुलियों को ग्रुप-डी कर्मचारियों का दर्जा देने, 50 साल से अधिक उम्र के कुलियों के बच्चों को नौकरी देने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। रेलवे व प्रशासनिक अधिकारियों ने कुलियों के नेताओं की बात इलाहाबाद मंडल के डीआरएम से कराई गई। इस दौरान तय हुआ कि 11 सितंबर को कुलियों का सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल डीआरएम से मिलेगा। पांच घंटे बाद रेलवे ट्रेक से आंदोलनकारी हटे।

कुलियों पर आरपीएफ व हाथरस जंक्शन थाने में दर्ज हुए मुकदमे

हाथरस जंक्शन पर शुक्रवार को हुए कुलियों के हंगामे व प्रदर्शन को लेकर हाथरस आरपीएफ व हाथरस जंक्शन थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए हैं। आरपीएफ इंस्पेक्टर हरिकेश कुमार के अनुसार पहला मुकदमा हाथरस जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक पवन कुमार की ओर से ऑल इंडिया रेलवे लाल वर्दी कुली यूनियन के कश्मीरी लाल, सरदार कुलदीप सिंह, फतेह सिंह, प्रकाश जाट, सरदार सरवन, ¨रकू, प्रकाश सिंह, राकेश यादव, गोलू समेत नौ लोगों को नामजद व करीब 2000 अज्ञात के खिलाफ रेलवे एक्ट 174ए, 145, 146 व 147 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। जबकि इसी मामले का दूसरा मुकदमा थाना हाथरस जंक्शन में स्टेशन अधीक्षक की ही तहरीर पर धारा 147, 149, 341, बंद विधिक अधिनियम 7 व 3 सार्वजनिक नुकसान अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।

बोर्ड को भेजी जाएंगी मांगे

उत्तर मध्य रेलवे के जनसपंर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि कुलियों की मांगें रेलवे बोर्ड से संबंधित हैं। ये मांगें बोर्ड को भेजी जाएंगीं। वहां से जो भी जवाब आएगा, उन्हें बता दिया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों को नहीं लगी भनक

एएसपी सिद्धार्थ वर्मा का कहना है कि कुलियों के आंदोलन के लेकर कोई इनपुट नहीं मिला था। रेलवे के अधिकारियों को भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी। कुली हाथरस जंक्शन में इस तरह का आंदोलन करने जा रहे हैं, इस बारे में भी इलाहाबाद से भी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। सुरक्षा की ²ष्टि को देखते हुए आगरा, अलीगढ़ से फोर्स बुला लिया गया था। वार्ता में मिले आश्वासन के बाद कुलियों ने रेलवे ट्रैक खाली कर दिया।

खुफिया एजेंसियों ने नहीं दिया इनपुट

टूंडला आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट योगेंद्र पाल का कहना है कि कुलियों के प्रदर्शन और आंदोलन को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली थी। खुफिया एजेंसियों ने भी इस पर कोई इनपुट नहीं दिया था। कुलियों की डीआरएम से वार्ता कराने के बाद आंदोलन खत्म करा दिया गया।

तीन करोड़ के नुकसान का अनुमान

पिछले काफी समय से तमाम पदाधिकारी इस आंदोलन की तैयारी में जुटे हुए थे। रेलवे ट्रैक को जाम कर ट्रेन रोकने वाले कुलियों में केवल हाथरस व अन्य स्टेशनों के कुली ही शामिल नहीं थे, बल्कि उसमें इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर से लेकर पंजाब व उड़ीसा तक के कुली भी शामिल रहे। गुरुवार से ही पदाधिकारियों का ट्रेनों के जरिए आने का सिलसिला शुरू हो गया था। ट्रेनों में कुली अपनी परंपरागत ड्रेस पहनने की बजाए सादा कपड़ों में पहुंचे थे। जबकि उनकी पहचान लाल रंग की ड्रेस अपने बैग व थैले में छिपाकर लेकर आए थे, ताकि किसी को पता न चल सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस आंदोलन से रेलवे को करीब तीन करोड़ रुपये का नुकसान होने का आंकलन किया गया है।

रौद्र रूप देखकर सहम गए थे अफसर

अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों किलोमीटर दूर हाथरस जंक्शन पर आकर रेलवे ट्रैक बाधित करने वाले कुलियों में जबरदस्त आक्रोश दिखा। मौके की नजाकत देखते हुए पुलिस व प्रशासनिक के अफसरों ने कुलियों पर सख्ती नहीं दिखाई। धौरपुर फाटक के निकट दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक सुबह सवा सात बजे बाधित कर दिए जाने की जानकारी मिलते ही सबसे पहले थाना हथरस जंक्शन पुलिस मौके पर पहुंची। थोड़ी ही देर में अपर जिलाधिकारी न्यायिक धर्मपाल ¨सह, एसडीएम सदर अरुण कुमार, सीओ सिटी सुमन कनौजिया व हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन के अफसर और रेलवे पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने कुलियों को समझाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन कुलियों की मांग थी कि जब तक उनकी वार्ता इलाहाबाद के डीआरएम से नहीं कराई जाती वे ट्रैक से नहीं हटेंगे। मौके की स्थिति को देखते हुए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया। इस दौरान कुलियों के साथ पुलिस ने सख्ती दिखाने की जरा भी कोशिश नहीं की, क्योंकि हजारों की संख्या में कुली थे और रेलवे ट्रैक पर गिंट्टी-पत्थर बिखरे पड़े थे। पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों ने संयम से काम लिया। थोड़ा वक्त लगा मगर हालात नहीं बिगड़ने दिया गया।

फ्लाइट मिस होने की रही टेंशन

कानपुर निवासी डॉ. अनूप व डॉ. हर्षिता को थाईलैंड जाना था। दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़नी थी। चक्का जाम हो जाने के कारण उन्हें अपनी ट्रेन छोड़नी पड़ी। काफी दूर तक पैदल चलने के बाद दोनों ने हाथरस जंक्शन से दूसरा वाहन करके अलीगढ़ पहुंचने की बात कही। दोनों डॉक्टरों का कहना था कि उन्हें थाईलैंड जाने के लिए दोपहर बाद दिल्ली से फ्लाइट पकड़नी है। इसलिए वे ट्रेन छोड़ने के लिए मजबूर हुए।

समय से नहीं पहुंचे मुकदमे में

दिल्ली निवासी एडवोकेट एसपीएस चौहान किसी महत्वपूर्ण मुकदमे के सिलसिले में लखनऊ जा रहे थे। लेकिन चक्का जाम हो जाने के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने बताया कि अपनी बात रखने के लिए यह तरीका कुलियों का ठीक नहीं है।

जर्मनी से लौटे, रास्ते में अटके

कानुपर में रहने वाली जसप्रीत कौर अपने परिवार के सदस्य सुरेंद्र मिश्रा के साथ दस दिन पूर्व जर्मनी गईं थीं। सुबह वापस आने के बाद उन्होंने दिल्ली से कानपुर के लिए ट्रेन पकड़ी। लेकिन चक्का जाम होने से परेशानी उठानी पड़ी। उन्होंने बताया कि पता नहीं था कि लंबा सफर करने के बाद इस तरह की परेशानी उठानी पड़ेगी।

वीआइपी ट्रेनें रोकने की थी योजना

कुलियों ने पंद्रह दिन पहले ही रेलवे ट्रैक को बाधित करने की योजना बना ली थी। किस जगह रेलवे ट्रैक को बाधित करके अपनी बात सरकार तक पहुंचानी है, यह सब तय हो चुका था। गुरुवार रात को ही कुलियों का आवागमन रणनीति के तहत हाथरस जंक्शन में शुरू हो गया, लेकिन भारी संख्या में कुलियों के आने की खबर स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को नहीं लग सकी।

16 राज्यों के कुलियों ने तैयार की रणनीति

आल इंडिया रेलवे लाल वर्दी कुली यूनियन के बैनर तले देश के महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ सहित 16 राज्यों के कुलियों ने चक्का जाम करने की रणनीति बनाई थी। यूनियन के राष्ट्रीय प्रधान कश्मीरी लाल ने दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान बताया कि पिछले कई साल से कुलियों को सरकारी नौकरी, बुजुर्ग कुलियों के आश्रितों को नौकरी देने के लिए संघर्ष किया जा रहा है। सात सितंबर को चक्का जाम की जानकारी पूर्व में ही लिखित रूप में दे दी गई थी। इसके बाद भी जब कोई निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ा। हाथरस जंक्शन यूनियन के लिए उपयुक्त स्थान था, क्योंकि जिस समय चक्का जाम किया गया तब इस रूट से कई ऐसी गाड़ियां निकलती हैं जिसमें वीवीआइपी और वीआइपी भी होते हैं। सुबह जैसे ही रेलवे ट्रैक बाधित करने की जानकारी अफसरों को मिली तो हड़कंप मच गया। यहां चक्का जाम करने से बात जल्दी ही उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई। इस ट्रैक पर शताब्दी, राजधानी, गोमती, नीलांचल, कालका आदि ट्रेनें आती हैं। इसलिए यहां आकर रेलवे ट्रैक बाधित करके अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाई गई। रणनीति के तहत ही दूर दराज के कुली कई दिन पूर्व ही हाथरस के लिए निकल लिए थे। कुली किसी बड़े स्टेशन पर अपना चक्का जाम नहीं कर पाते, इसलिए भी उन्होंने हाथरस जंक्शन को चुना, क्योंकि जब तक अधिकारी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही वे अपनी बात अधिकारियों के कानों तक पहुंचा चुके थे।

--------

Posted By: Jagran