अलीगढ़, जेएनएन।  पितृपक्ष दो सितंबर से शुरू हो रहा है। इसमें श्रद्धा के साथ लोग पितरों का पूजन करेंगे। 17 सितंबर को अमावस्या पर समापन होगा।  खासबात  है कि नवरात्र पितृपक्ष के एक माह बाद शुरू होंगे। ऐसा आश्विन मास में अधिकमास  पड़ने  से है। बताया जा रहा है कि 165 वर्ष पहले भी पितृपक्ष खत्म होने के एक महीने बाद नवरात्र शुरू हुए थे।

ज्योतिषाचार्य आदित्य नारायण अवस्थी ने बताया कि 19 साल बाद अश्विन माह का अधिमास इस साल मिल रहा है। इस बार चतुर्मास पांच महीने का है, जो एक जुलाई से शुरू हुआ है और 25 नवंबर तक चलेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे श्रेष्ठ भारतीय संस्कृति है। यहां अपने पितरों का भी पूजन किया जाता है। दो सितंबर से  श्राद्ध  शुरू हो जाएंगे। इस क्रम में प्रतिपदा का  श्राद्ध  3, द्वितीया का 4, तृतीया का 5, चतुर्थी का 6, पंचमी का 7, षष्ठी का 8, सप्तमी का 9, अष्टमी का 10, नवमी का 11, दशमी का 12, एकादशी का 13, द्वादशी का 14, त्रयोदशी का 15 और चतुर्दशी का 16 सितंबर को  श्राद्ध  कर्म किया जाएगा। 17 सितंबर को पितृ विसर्जन हो जाएगा। उस दिन जिन लोगों के निधन की तिथियां ज्ञात नहीं है उनका  श्राद्ध  किया जाएगा।

पहली बार संख्या होगी कम

आदित्य नारायण अवस्थी ने बताया कि गया और हरिद्वार में  बड़ी  संख्या में लोग पितरों के तर्पण के लिए जाते हैं। इस बार कोरोना वायरस के चलते लोगों का जाना कम होगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धा से तर्पण करेंगे तो पितरों तक जरूर पहुंचेगा। शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए कार्यक्रम करें।

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