फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह को झटका: अलीगढ़ तहसील कोर्ट में दाखिल याचिका खारिज, चाची को मिली बड़ी राहत
अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह की पैतृक संपत्ति विवाद में अलीगढ़ के तहसील न्यायालय में दाखिल याचिका खारिज हो गई है। यह ...और पढ़ें

थाने में अभिनेता का फाइल फोटो।
HighLights
अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह की तहसील कोर्ट में याचिका खारिज।
पैतृक संपत्ति विवाद 1885 की हवेली और 56 एकड़ जमीन पर।
चाची गायत्री देवी को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। पैतृक संपत्ति के विवाद में फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह की ओर से काेल तहसीलदार न्यायालय में दाखिल याचिका (रेस्ट्रोरेशन) गत सप्ताह को खारिज कर दी गई। करीब 10 एकड़ में फैली वर्ष 1885 में बनी पैतृक हवेली और उससे जुड़ी करीब 56 एकड़ जमीन को लेकर परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों पक्ष संपत्ति पर अपना-अपना अधिकार जता रहे हैं।
विवाद चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाइयों तथा चाचा गंगा सिंह के परिवार के बीच है। माचिस, क्या कहना और दाग द फायर जैसी हिट फिल्म देने वाले अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई फिल्म निर्माता निर्देशक अभिमन्यु सिंह का दावा है कि उनके दादा हरेंद्र पाल सिंह की वर्ष 1995 की पंजीकृत वसीयत में पैतृक संपत्ति उनके तीनों पुत्रों के बीच बराबर बांटी गई थी।
1885 में बनी करीब 10 एकड़ में फैली पैतृक हवेली को लेकर लंबे समय से है विवाद
हरेंद्र पाल सिंह की गंभीर बीमारी का फायदा उठाकर उनकी मृत्यु से एक दिन पहले 30 जनवरी 1997 को दूसरी वसीयत तैयार कराई गई और संपत्ति गंगा सिंह के बेटे जय सिंह के नाम कर दी गई। दूसरी ओर, गंगा सिंह के परिवार का दावा रहा है कि हरेंद्र पाल सिंह की अंतिम वसीयत ही मान्य है और उसमें संपत्ति जय सिंह के नाम की गई थी।
इसी वसीयत को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद है। अक्टूबर 2025 में गंगा सिंह की मृत्यु के बाद विवाद उस समय खुलकर सामने आया, जब चंद्रचूड़ सिंह परिवार के साथ पैतृक हवेली पहुंचे।

चाची सहित स्वजन पर संपत्ति हड़पने का चंद्रचूड़ ने लगाया था आरोप
आरोप है कि उनकी चाची गायत्री देवी ने उन्हें हवेली में प्रवेश करने से रोक दिया। बाद में पुलिस की मौजूदगी में उन्हें हवेली में प्रवेश कराया गया। इसके बाद दोनों पक्षों ने अधिकारियों के समक्ष अपने-अपने दावे और दस्तावेज रखे। इसी विवाद को लेकर अभिमन्यु सिंह ने 14 अगस्त 2026 को रोरावर थाने में गायत्री देवी, जय सिंह, अंजनी सिंह, वसीयत के गवाहों और अधिवक्ता समेत सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाते हुए मुकदमा पंजीकृत कराया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

इसी हवेली का चल रहा है विवाद।
चाची पहुंची हाईकोर्ट, गिरफ्तारी पर रोक
पैतृक संपत्ति के विवाद में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी की आशंका के चलते चंद्रचूड़ सिंह की चाची गायत्री देवी सहित चार आरोपितों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायधीष ने गायत्री देवी सहित सभी आरोपित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह व सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। याचिका पर 12 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने गायत्री देवी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।
सात लोगों को बनाया गया आरोपित
अभिमन्यु सिंह की ओर से 14 अगस्त 2026 को रोरावर थाने में पंजीकृत कराए गए मुकदमे में गायत्री देवी समेत सात लोगों को आरोपित बनाया गया है। गायत्री देवी ने मुकदमे और उससे उत्पन्न पुलिस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और वादी पक्ष से जवाब भी मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सीडी सिंह व न्यायमूर्ति तरूण अग्रवाल की खंडपीठ ने जय सिंह और गायत्री देवी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में अलीगढ़ में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी।
अलीगढ़ में दर्ज हुई थी एफआईआर
इस आरोप के आधार पर अलीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर के बाद जय सिंह और गायत्री देवी ने गिरफ्तारी से राहत की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचियों की ओर से दलील दी गई कि दोनों स्वीडन के नागरिक हैं। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार और वादी पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बहन गिरजा कुमारी के बयान ने दी मजबूती
गिरजा कुमारी ने दिसंबर 2025 में अपने भाई स्व. गंगा सिंह के विरोध में अपने बयान दिए थे। उन्होंने डीएम व एसएसपी के नाम दिए एफीडेविट में दावा किया है कि जब उनके पिता हरेंद्र सिंह का निधन हुआ था, तब वे एक माह से हवेली में ही थी। वे इतने बीमार थे कि न तो वे किसी को पहचान सकते थे। न ही हस्ताक्षर करने की दिशा में थे।
मौत से एक दिन पहले बनी वसीयत को बताया था कूटरचित
मृत्यु से एक दिन पहले जिस वसीयत को गंगा सिंह असली बता रहे थे, वह कूट रचित दस्तावेजों से तैयार व फर्जी थी। यही बयान मुकदमा पंजीकरण में सहायक रहा। आरोपित गायत्री देवी के जेठ पुण्य प्रताप सिंह के चार संतान हैं। इनमें दो बेटा युद्धिष्ठ सिंह व अगस्त सिंह व दो बेटी हैं। यह मुंबई व लंदन में रहते है। यह भी अपनी चाची गायत्री देवी के विरोध में हैं।
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वकील ने कहा, हाई कोर्ट जाएंगे
चंद्रचूड़ सिंह के अधिवक्ता चतर सिंह ने बताया है कि उन्होंने अपने क्लाइंट के पक्ष में तहसीलदार कोर्ट में एक अपील (रेस्ट्रोरेशन) दाखिल की थी, जिसमें जयसिंह के नाम की गई वसियत को एक पक्षीय निर्णय लेते हुए मान्य माना था। इसे तहसीलदार ने 19 वर्ष बाद इस प्रकरण की अपील खारिज कर दी। अब अगले सप्ताह एसडीएम कोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी। कुछ हाईकोर्ट की रूलिंग के दस्तावेज साथ जोड़े जाएंगे।
इसी विवाद से जुड़े मामले में फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह की ओर से तहसील न्यायालय में दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। न्यायालय ने याचिका खारिज कर तहसीलदार न्यायलय में चूद्रचूड़ व उनके भाई अभिमन्यु सिंह की ओर से दाखिल याचिका (रेस्ट्रोरेशन) का निस्तारण कर दिया गया है। यह पुराना मामला था। इस लिए चंद्रचूड़ पक्ष को राहत नहीं मिली।
