यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 16, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Online workshop At AMU : आईजीएनसीए के प्रो. रमेश सी गौड़ ने कहा, शोध की गुणवत्ता में सुधार जरूरी
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र आईजीएनसीए नई दिल्ली के डीन एवं प्रमुख कलानिधि प्रो. रमेश सी गौड़ ने शोधकर्ताओं से ...और पढ़ें

अलीगढ़, जेएनएन। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र आईजीएनसीए नई दिल्ली के डीन एवं प्रमुख कलानिधि प्रो. रमेश सी गौड़ ने शोधकर्ताओं से साहित्य की समीक्षा के साथ नई शोध समस्याओं पर काम करने का आग्रह किया है। साथ ही डेटा संग्रह के लिए पत्र लेखन, उत्कृष्ट शोधकर्ताओं के साथ सहियोग तथा शीर्ष सम्मेलनों में इनको प्रस्तुत करने का सुझाव दिया। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सामाजिक विज्ञान संकाय, द्वारा आयोजित ”गुणवत्ता अनुसंधान और प्रकाशन नैतिकता” पर आयोजित आनलाइन कार्यशाला में मुख्य भाषण दे रहे थे।”
प्रोफेसर गौड़ ने शोध कौशल विकसित करने के तरीकों और शोध की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रकाशन नैतिकता के बारे में जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ई-रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे साहित्यिक पहचान उपकरण, व्याकरण उपकरण, संदर्भ प्रबंधन उपकरण और अन्य चीजों के बीच पुस्तकालय सूचना सेवा जैसे अनुसंधान प्रकाशनों में गुणवत्ता बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। प्रोफेसर गौड़ ने साहित्यिक चोरी पर अंकुश लगाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा की गई पहल के बारे में भी बताया।
गुणवत्ता बढ़ाने की आवश्यकता
उद्घाटन भाषण में एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रोफेसर मंसूर ने कहा गुणवत्ता अनुसंधान गुणवत्ता प्रमाण के लिए एक अग्रदूत है। फैकल्टी सदस्यों और अनुसंधान वैज्ञानिकों को विद्वानों की दुनिया में उत्कृष्ट पहचान बनाने के लिए शोध में मात्रा के बजाय गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों की रैंकिंग बढ़ाने में गुणवत्ता प्रकाशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मानद अतिथि अजय कुमार गुप्ता (निदेशक, अनुसंधान और प्रभारी प्रकाशन, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद-आईसीएसएसआर, नई दिल्ली) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आईसीएसएसआर विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से सामाजिक विज्ञान में गुणवत्ता अनुसंधान को बढ़ावा देने में किस प्रकार से भूमिका निभा रहा है। उन्होंने संकाय सदस्यों, पीडीएफ और अनुसंधान विद्वानों के लिए आईसीएसएसआर छात्रवृत्ति और फैलोशिप पर भी चर्चा की। प्रो निसार अहमद खान (डीन, सामाजिक विज्ञान संकाय) ने उन कारकों और घटकों के बारे में बात की, जो अनुसंधान की गुणवत्ता और प्रकाशन नैतिकता को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान की गुणवत्ता, साहित्यिक चोरी और यूजीसी दिशानिर्देशों को प्रभावित कर सकते हैं।
साहित्यिक चोरी और टर्निटिन सॉफ्टवेयर के उपयोग पर चर्चा
कार्यशाला के समन्वयक, प्रोफेसर नौशाद अली पीएम (पुस्तकालय और सूचना विज्ञान विभाग) उच्च शिक्षा प्रणाली में अनुसंधान की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुसंधान गुणवत्ता और प्रकाशन नैतिकता को बनाए रखने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए नीतियों और कदमों के बारे में विस्तार से बताया। प्रोफेसर एम मधुसूदन, (पुस्तकालय और सूचना विज्ञान विभाग और पूर्व-डिप्टी डीन-शिक्षाविद, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने शोध में निष्ठा विषय पर एक चर्चा की, जिसमें उन्होंने साहित्यिक चोरी का पता लगाने के लिए साहित्यिक चोरी और टर्निटिन सॉफ्टवेयर के उपयोग पर चर्चा की। प्रोफेसर उपेंद्र चैधरी (राजनीति विज्ञान विभाग, एएमयू और पूर्व सदस्य सचिव, और निदेशक, अनुसंधान, आईसीएसएसआर, नई दिल्ली) ने एक अच्छा शोध प्रस्ताव तैयार करने के तरीकों पर चर्चा की। गुणवत्ता अनुसंधान के लिए स्मार्ट उपकरणों पर बोलते हुए, निकेश नारायणन (सहायक प्रोफेसर और लाइब्रेरियन-आईटी, जायद विश्वविद्यालय, दुबई, यूएई) ने संदर्भ प्रबंधन, प्रबंधन अनुसंधान प्रोफाइल और अनुसंधान डेटा प्रबंधन के लिए विभिन्न उपकरणों के उपयोग का प्रदर्शन किया। प्रोफेसर पी एम नौशाद अली पीएम ने समापन भाषण दिया और प्रोफेसर निसार अहमद खान ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्रों के साथ विभिन्न भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के 683 से अधिक विद्वानों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
