अलीगढ़, जागरण संवाददाता।  भाजपा में दावेदारों ने ताल ठोकनी शुरू कर दी है। तमाम ऐसे दावेदार हैं, जो खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने बकायदा प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया है। होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर से शहर को पाटने लगे हैं। इससे चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी है। तमाम और दावेदार हैं, वो भी आने की तैयारी कर रहे हैं।

सबसे अधिक दावेदार भाजपा में

चुनाव में सबसे अधिक दावेदार भाजपा में हैं, वह चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि, भाजपा में दो साल से दावेदार पसीना बहा रहे हैं, गांव-गांव भ्रमण करके वह चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं, मगर खुलकर अभी तक सामने नहीं आए थे। अब तो बकायदा होर्डिंग्स और बैनर पर सामने आ रहे हैं। प्रचार करने का भी तरीका पूरी तरह से साफ है। वह प्रत्येक विधानसभा का नाम लिख रहे हैं। कोल विधानसभा क्षेत्र में इस समय सबसे अधिक दावेदार हैं। इसमें करीब 50 से अधिक दावेदार मैदान में आ गए हैं। चंद्रमणि कौशिक, अन्नू आजाद, राजीव शर्मा, मनोज शर्मा खुलकर प्रचार कर रहे हैं। वहीं, हाथरस के मुकुल उपाध्याय भी प्रचार प्रयार में जुट गए हैं। वो वाल पेंटिंग के माध्यम से प्रचार में जुटे हुए हैं, जबकि ये सभी नेता मौके को भांपकर खुलकर सामने नहीं आ रहे थे, अब उन्हें लग रहा है कि चुनाव का समय कम है, यदि अब खुलकर मैदान में ताल नहीं ठोकेंगे तो टिकट के लिए उनका नाम सामने नहीं आने वाला है।

संपर्क के माध्‍यम से नेता रख रहे अपनी बात

हालांकि, भाजपा में सिर्फ अभी संपर्क के माध्यम से नेता अपनी बात रख रहे हैं। अभी आवेदन नहीं किया जा रहा है यदि आवेदन की घोषणा होगी तो पूरे जिले से 200 से अधिक दावेदार होंगे, जो चुनाव में ताल ठोकते हुए नजर आएंगे। क्योंकि सातों विधानसभा क्षेत्रों में 50-50 से अधिक दावेदार हेैं, जो टिकट की मांग कर रहे हैं। तमाम ऐसे हैं जो विविध संगठनों से आए हुए हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। खैर, इगलास, बरौली, कोल, शहर और छर्रा सीटों पर दावेदारों की भरमार है। हालांकि, अतरौली सीट पर दावेदार अभी सामने नहीं आ रहे हैं। क्योंकि इस सीट पर एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया के पुत्र राज्य मंत्री संदीप सिंह हैं, इसलिए कोई भी नेता इस सीट पर दावेदारी करके विवाद में नहीं पड़ना चाहता है। जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह का कहना है कि भाजपा में लोकतंत्र है, जो भी आवेदन करना चाहे और बात रखना चाहे ऊपर के पदाधिकारियों को रख सकता है। यहां किसी भी तरह की कोई रोकटाेक नहीं है। हालांकि, दावेदार कितना भी ताल ठोक लें मगर टिकट मजबूत पकड़ वालों को मिलेगी, भाजपा जिताऊं प्रत्याशी ही उतारेगी। किसी भी तरह का वह दांव नहीं खेलना चाहेगी।

Edited By: Anil Kushwaha