अलीगढ़, जागरण संवाददाता । टीबी यानी क्षय रोग के समूल नाश को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार बहुत गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 तक टीबी के खात्मे का लक्ष्य रखा है। अब फिर से एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान शुरू हुआ है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य टीबी के ऐसे मरीजों को तलाशना हैं, जो छिपे हुए हैं। जिन्हें खुद नहीं पता कि उनको टीबी की बीमारी है। पहले घर-घर जाकर स्क्रीनिंग होती थी, अब टीमें सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर जांच कर रही हैं। 17 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान में करीब 50 नए मरीज मिल चुके हैं।

लोगों की हो रही स्‍क्रीनिंग

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. अनुपम भास्कर ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत एक्टिव केस फाइंडिंग तृतीय चरण का विशेष अभियान शुरू किया गया है। अभी तक घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिग कर नए मरीज चिह्नित किए जा रहे हैं। विभागीय टीमें फल मंडी, सब्जी मंडी, श्रमिक बाजार, ईंट भट्टे, साप्ताहिक बाजार, निर्माणाधीन भवन व अन्य स्थलों पर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। टीबी के लक्षण मिलने पर निकटतम बलगम जांच केंद्र पर जांच कराई जाएगी। टीबी की पुष्टि होने पर इलाज शुरू किया जाएगा।

टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। इससे ग्रसित मरीज को उपचार पर लिया जाना जरूरी है, अन्यथा वह अपने परिवार व आसपास के अन्य लोगों को भी यह बीमारी फैलाएगा। लिहाजा, इस अभियान में स्वास्थ्य ही नहीं, अन्य विभागों व सामाजिक संगठनों और संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य छिपे हुए टीबी मरीजों को ढूंढकर इलाज पर रखा जा सके, जिससे वह अपने घर-परिवार व आसपास में टीबी ना फैलाएं।

ये हैं टीबी के लक्षण

जिला कार्यक्रम समन्वयक सत्येंद्र कुमार ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक की खांसी हो, वजन कम होता हो, भूख ना लगती हो अथवा शाम में बुखार व पसीना आने की शिकायत हो, ऐसे किसी भी व्यक्ति के निकट के सरकारी अस्पताल में जाकर बलगम की जांच करा सकते हैं। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर उनका इलाज भी शुरू हो सकता है। इलाज के बाद टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है।

Edited By: Anil Kushwaha