अलीगढ़, जेएनएन। कोरोना संक्रमण काल में विद्यार्थियों की पढ़ाई आनलाइन माध्यम पर ही आश्रित हो गई थी। मगर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में घातकता इतनी ज्यादा थी कि सरकार को आफलाइन और आनलाइन दोनों माध्यम से पढ़ाई पर रोक लगानी पड़ी। अब जब संक्रमण से राहत मिली तो कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों समेत छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों की आनलाइन पढ़ाई कराने का फैसला शासनस्तर से किया गया। सरकारी स्कूलों में तमाम विद्यार्थी एंड्रायड फोन और इंटरनेट सुविधा ना होने की वजह से आनलाइन पढ़ाई से नहीं जुड़ पाते थे। इसलिए उनकी पढ़ाई ई-पाठशाला के जरिए दूरदर्शन पर प्रसारण दिखाकर कराने का फैसला लिया गया। वहीं माध्यमिक विद्यालयों के बच्चे और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं की आनलाइन पढ़ाई शुरू कराई गई। मगर इन विद्यार्थियों ने आनलाइन पढ़ाई में कितना सीखा है? क्या पढ़ा? इसकी रिपोर्ट तैयार होगी।

पढ़ाई के प्रति रुचि कम हुई

सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का आकलन करने का काम एनसीईआरटी की ओर से किया जाएगा। यह निरीक्षण स्कूल कालेजों में हो रही आनलाइन पढ़ाई की पोल खोलने के लिए काफी होगा।

एनसीईआरटी इस साल नवंबर में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण करेगा। कक्षा तीन, पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण इससे पहले 2017 में और कक्षा 10 के लिए 2018 में किया गया था। इस सर्वेक्षण में उक्त कक्षाओं के विद्यार्थियों की ओर से की गई पढ़ाई का आकलन किया जाएगा। सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार करके प्रदेश व केंद्र सरकार के पास भी भेजी जाएगी। इससे विद्यार्थियों की शिक्षा का वास्तविक आकलन कर भविष्य में उनकी तैयारी कराने की योजना तैयार करने की मंशा सरकार की है। कोरोना काल में शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। उनकी परीक्षाएं ना होने से भी पढ़ाई के प्रति रुचि व लगन में कमी आई है।