अलीगढ़, जागरण संवाददाता । सड़कों पर गड्ढे ही मुश्किलें खड़ी नहीं कर रहे, क्षतिग्रस्त डिवाइडर भी मुसीबत बने हुए हैं। देखरेख के अभाव में ये डिवाइडर सड़क में समाते जा रहे हैं। कुछ सड़कें तो ऐसी हैं, जहां डिवाइडर का आस्तित्व ही मिट चुका है। मिट्टी और मलवा देखकर ही अनुमान लगाया जाता है कि यहां कभी डिवाइडर भी था। दरअसल, इन सड़कों पर वाहनों के टकराने से एक बार डिवाइडर क्षतिग्रस्त हुआ तो उसकी मरम्मत नहीं की गई। क्षतिग्रस्त हिस्से से डिवाइडर उखड़ता चला गया। ऊपर की ठोस परत हटी तो अंदर भरा मिट्टी और मलवा बारिश के पानी में बह गया।

सरकारी महकमों की अनदेखी का नतीजा

गांधीपार्क बस अड्डे से सारसौल चौराहे तक डिवाइडर की हालत देखकर ही सरकारी महकमों की अनदेखी का अंदाजा लगाया जा सकता है। बीच-बीच में डिवाइडर का बड़ा हिस्सा गायब है। वाहन आसानी से रोड क्रास कर लेते हैं, जो जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसके चलते कई हादसे भी हो चुके हैं। बावजूद इसके न अलीगढ़ विकास प्राधिकरण चेता, न नगर निगम और न ही पीडब्ल्यूडी ने कोई प्रयास किए। जबकि, सड़कों के निर्माण और मरम्मत में करोड़ों रुपया लगाने का दावा ये विभाग करते हैं। यही हाल अनूपशहर रोड पर जमालपुर फ्लाईओवर के निकट हाईवे का है। यहां भी डिवाइडर सालों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। रेङ्क्षलग भी नहीं है। कोल विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने डिवाइडर ठीक कराने के लिए कई बार शिकायतें कीं, लेकिन इनका संज्ञान नहीं लिया गया।

हादसों की वजह बना हुआ है डिवाइडर

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह डिवाइडर हादसों की वजह बना हुआ है। हर रोज दो-तीन हादसे इसी की वजह से होते हैं। कभी वाहन डिवाइडर पर चढ़ जाते हैं, तो कभी पलट जाते हैं। कांग्रेस नेता साहिल उस्मानी ने बताया कि बारिश के चलते डिवाइडर ही हालत और खस्ता हो गई है। रात में इस मार्ग से निकलना बहुत जोखिम भरा है। स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं। अंधेरे में वाहन चालक डिवाइडर का अंदाजा नहीं लगा पाते और डिवाइडर पर वाहन चढ़ जाता है। उन्होंने डिवाइडर पर रेलिंग लगाने की मांग की है। मेडिकल रोड पर नगर निगम ने डिवाइडर उखाड़ा था, लेकिन सड़क ठीक नहीं की। इससे भी वाहन चालकों को परेशानी हो रही है।

Edited By: Anil Kushwaha