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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डेंगू के डंक से ज्यादा मरीजों को जांच से डर

By JagranEdited By:
Published: Tue, 16 Nov 2021 07:43 PM (IST)

जिले में डेंगू का प्रकोप भले ही थम गया हो लेकिन मौसमी बुखार तेजी से पैर पसार रहा है।

डेंगू के डंक से ज्यादा मरीजों को जांच से डर
डेंगू के डंक से ज्यादा मरीजों को जांच से डर

जासं, अलीगढ़: जिले में डेंगू का प्रकोप भले ही थम गया हो, लेकिन मौसमी बुखार तेजी से पैर पसार रहा है। ऐसे में मरीजों को अभी भी डेंगू के नाम पर खूब डराया जा रहा है। यहां डेंगू की जांच के नाम पर प्राइवेट पैथोलाजी सेंटरों की मनमानी जारी है। शहर की निजी पैथोलाजी लैबों पर अभी भी 1200 से 2000 रुपये में जांच हो रही है, जबकि जांच 250-300 रुपये वाली किट से ही हो रही है। कुछ ही लैब एनएस-1, आइजीजी व आइजीएम जांच कर रहे हैं। यह जांच भी 1200 रुपये से अधिक में नहीं होनी चाहिए। जांच के नाम पर चल रहे खेल में कुछ निजी डाक्टर व झोलाछाप भी शामिल हैं। इससे मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे हो रहा खेल

सितंबर में डेंगू का प्रकोप बढ़ने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू जांच ( एनएस-1, आइजीजी व आइजीएम टेस्ट ) के लिए 1000 से 1200 रुपये की दर तय की थी। क्योंकि, एलाइजा टेस्ट की सुविधा एक-दो लैबों में ही है। चिता की बात ये है कि जांच के नाम पर खेल बंद नहीं हुआ। इन तीनों जांच के लिए वर्तमान में भी 1600 से 2000 तक वसूले जा रहे हैं। कुछ लैब तो रेपिड डायग्नोस्टिक किट से ही एनएस-1 जांच की रिपोर्ट दे रहे हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ बुखार के मरीजों की पहले कंपलीट ब्लड काउंट(सीवीसी) कराते हैं। जो मात्र 200-300 रुपये में होती है। इसमें हीमोग्लोविन, व्हाइट ब्लड सैल, प्लेटलेट्स व हिमेटोक्रिट का पता चल जाता है। यदि ब्लड सेल व प्लेटलेट्स कम होती हैं तो विशेषज्ञ मरीज को डेंगू संदिग्ध मानते हुए एनएस-1, मलेरिया या कई बार ज्यादा बुखार होने पर टाइफाइड की जांच कराते हैं। पहले सीवीसी कराने से सामान्य मरीज की जेब पर ज्यादा भार नहीं पड़ता, लेकिन तमाम चिकित्सक व लैब संचालक आपसी सांठगांठ से डेंगू की जांच के नाम पर खूब मनमानी कर रहे हैं।

नहीं होता स्टिग

मरीजों के इलाज की बात हो या जांच दरों की, स्वास्थ्य विभाग कभी अस्पतालों व पैथोलाजी लैबों पर जाकर जांच नहीं करता। डेंगू के नाम पर इतनी लूट मचने के बाद ही एक स्टिग आपरेशन नहीं किया गया और न किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई। नतीजतन, यह खेल अभी तक चल रहा है। इसके चलते मुख्यमंत्री योगी को स्वयं कार्रवाई के निर्देश देने पड़े हैं।

यहां हो रही मुफ्त जांच्र

सरकारी अस्पतालों में डेंगू की मुफ्त जांच हो रही है। यदि, किसी मरीज को डेंगू के लक्षण हों तो वे जेएन मेडिकल कालेज, जिला मलखान सिंह चिकित्सालय व पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में पहुंचकर जांच करा सकता है। यहां डेंगू की एलाइजा मशीन से जांच की निश्शुल्क सुविधा उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्र में सीएचसी-पीएचसी पर रेपिड डायग्नोस्टिक किट उपलब्ध हैं। इसमें डेंगू की पुष्टि होने पर एलाइजा जांच कराई जा रही है।

इनका कहना है

मरीजों से तय से अधिक शुल्क वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन ने जो शुल्क तय किया है, वही लिया जाए। डेंगू के नाम पर मरीजों को डराने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।

- डा. आनंद उपाध्याय, सीएमओ।