अलीगढ़ (जेएनएन)।  टप्पल में मासूम के साथ हुई दरिंदगी में पुलिस की थ्योरी गले नहीं उतर रही। पुलिस का दावा है कि बच्ची से दुष्कर्म नहीं हुआ, जबकि पीएम रिपोर्ट के अनुसार किडनी, पेशाब की थैली के साथ प्राइवेट पार्ट ही गायब मिले। ऐसी स्थिति में यह बताना संभव ही नहीं था कि दुष्कर्म नहीं हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार इतनी छोटी बच्ची के साथ सहज संबंध संभव नहीं है। यदि जबरदस्ती होती है तो लेबिया मेजोरा (वेजाइना का ऊपरी हिस्सा) की हालत देखकर अंदाजा लगा लेते हैं। यदि यह हिस्सा ही नहीं था तो दुष्कर्म न होने की पुष्टि गलत है। शायद यही वजह है कि वेजाइल स्वैब को जांच के लिए लैब भेजा गया है। दूसरी ओर, तीन सदस्यीय टीम ने पोस्टमार्टम किया था। विशेषज्ञों के अनुसार पीएम रिपोर्ट से साफ है कि बच्ची के साथ काफी दिरंदगी हुई। शरीर के हिस्सों को खूब नुकसान पहुंचाया गया।

डीएनए टेस्ट खोल सकता है हत्या का राज

बच्ची की हत्या का राज डीएनए (डीऑक्सी राइबो न्यूक्लिक एसिड) टेस्ट से खुल सकता है। एसएसपी ने बताया कि आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है, इसलिए कोर्ट से अनुमति लेकर उनके खून के सैंपल व फिंगर प्रिंट्स लेकर जांच को फॉरेंसिक लैब आगरा भिजवाए जाएंगे।

दो दिन तक नहीं भेजे फॉरेंसिक जांच को सैंपल

लापता होने वाले बच्चों की गुमशुदगी व उनकी तलाश में पुलिस किस कदर लापरवाही बरतती है, यह किसी से छिपा नहीं है। टप्पल में मासूम की हुई हत्या के मामले में भी पुलिस की लापरवाही सामने आई है। गायब होने की सूचना पर पुलिस देरी से सक्रिय हुई और शव बरामद होने के बाद फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल दो दिन बाद भेजे गए। बच्ची 30 मई को गायब हुई, तब परिजनों ने इधर-उधर तलाशा। थाने गए और जानकारी दी। गुमशुदगी दर्ज कर उसे तलाशने की मांग की। पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कह दिया आस-पड़ोस में तलाश कर लो, मिल जाएगी। परेशान परिजन तलाश में जुटे रहे। रात भर न मासूम न मिली तो अगले दिन फिर थाने पहुंचे तब कहीं जाकर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। हालांकि, गुमशुदगी दर्ज करने के अलावा पुलिस ने बच्ची को तलाशने में अपने स्तर से कोई प्रयास नहीं किया। खासकर तब भी पुलिस नहीं चेती जब परिजनों ने जाहिद से रुपयों को लेकर हुए विवाद व उसके अंजाम भुगत लेने की धमकी की जानकारी दी। परिजनों ने मामले में एसएसपी से शिकायत की तब टप्पल पुलिस सक्रिय हुई। तब तक देर हो चुकी थी। दो जून को बालिका का शव कूड़े के ढेर पर मिला। पुलिस अफसरों ने भी माना कि इस प्रकरण में घोर लापरवाही बरती गई। जिसकी गाज टप्पल के तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिस कर्मियों पर निलंबन के रूप में गिरी।

चार को भेजे सैंपल

बच्ची का पोस्टमार्टम दो जून को हुआ। चार जून की शाम फॉरेंसिक लैब आगरा में उक्त सैंपल भेजे गए। अगले दिन ईद का अवकाश हो गया। इस जांच में कम से कम तीन दिन लगते हैं। यदि पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती और दो जून को ही सैंपल भेज दिया होता तो अब तक लैब से जांच की रिपोर्ट भी मिल जाती।

हत्या की जांच करेगी एसआइटी,आरोपितों पर लगेगा रासुका

टप्पल में हुई ढाई साल की बच्ची की जघन्य हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर देशभर में गुस्से का इजहार किए जाने के बाद डीजीपी मुख्यालय हरकत में आ गया है। डीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने शुक्रवार को जांच के लिए अलीगढ़ के एएसपी (देहात) मणिलाल पाटीदार के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआइटी गठित कर दी। फॉरेंसिक साइंस के विशेषज्ञों को भी लगाया गया है, जो तीन सप्ताह में रिपोर्ट देंगे। आरोपितों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और पॉक्सो एक्ट में भी कार्रवाई की तैयारी है। केस की सुनवाई फास्ट्र ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी। क्रिकेट और फिल्म जगत की हस्तियों के बाद शुक्रवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया। राहुल ने कहा कि ऐसी हैवानियत कोई कैसे कर सकता है? वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया कि उप्र में जंगल राज है। बालिका की वीभत्स हत्या और पुलिस की लापरवाही को लेकर सोशल मीडिया पर नौ जून को टप्पल चलो के आह्वïान के संदेश चल रहे हैैं।

ऐसी स्थिति में होती है एनएसए की कार्रवाई

वरिष्ठ अधिवक्ता बुद्धपाल सिंह के अनुसार एनएसए की कार्रवाई तब होती है, जब आरोपित गिरोहबंद होकर राज्य सरकार की संपत्ति या समाज के लिए हानिकारक होता है और उसके कृत्यों से जनहानि होने की संभावना होती है। ऐसी दशा में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर डीएम शासन में एनएसए की कार्रवाई के लिए संस्तुति करते हैैं।  जहां से सहमति मिलने पर संस्तुति लखनऊ स्थित एडवाइजरी बोर्ड के पास जाती है। तीन सदस्यीय एडवाइजरी बोर्ड में हाईकोर्ट के जज बैठते हैं, जो इस पर अंतिम मुहर लगाते हैं। एडवाइजरी बोर्ड एनसए रिपोर्ट का अध्ययन करता है। इसमें देखा जाता है कि जिस व्यक्ति पर एनएसए लगाई गई है, उसका इतिहास क्या रहा है? यदि बोर्ड ने एनएसए पर मुहर लगा दी तो इसे हाईकोर्ट में ही चुनौती दी जा सकती है।

क्या है पॉक्सो एक्ट

पॉक्सो यानी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम। 2012 में यह अधिनियम महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बनाया था।

क्यों हुई हत्या

टप्पल में एक मिस्त्री की ढाई साल की मासूम 30 मई को गायब हो गई थी। दो जून को उसका क्षत-विक्षत शव घर से 100 मीटर दूर कूड़े के ढेर पर मिला था। मामले में पुलिस ने दो आरोपितों जाहिद और असलम को जेल भेजा था।  डॉग स्क्वायड भी इन्हीं आरोपितों के घर तक गया था। एसएसपी ने बताया कि आरोपित जाहिद ने बच्ची के पिता से 50 हजार रुपये उधार लिए थे। 45 हजार लौट दिए थे। पांच हजार के लिए बच्ची के पिता ने जाहिद को अपमानित किया था। उसी का बदला लेने के लिए जाहिद ने साथी असलम के साथ मिलकर कपड़े से गला घोंटकर बच्ची की हत्या कर दी। शव को भूसे के ढेर में छिपा दिया था। बदबू आने पर शव को कूड़े के ढेर पर फेंक दिया था। पुलिस को क्षत-विक्षत शव कपड़े में बंधा मिला था। इसका दायां हाथ भी गायब था।

डीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने कहा कि स्थानीय पुलिस पर लग रहे लापरवाही के आरोप की भी जांच कराई जा रही है। एसआइटी की रिपोर्ट मिलने पर आगे कार्रवाई होगी।

दरिंदे ने बेटी संग भी किया था दुष्कर्म, दिल्ली से बच्चे का अपहरण

मुख्य आरोपित असलम ने 2014 में अपनी बेटी के साथ भी दुष्कर्म किया था, जिस पर उसकी पत्नी ने ही थाना टप्पल में  मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में आरोपित जेल से जमानत पर छूटा तो कस्बे में ही एक महिला से छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज हुआ। फिर उसने दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके से एक बच्चे का अपहरण कर लिया। दिल्ली पुलिस ने आरोपित को पकड़कर बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया था। टप्पल थाने में ही उसके खिलाफ यूपी गुंडा एक्ट में तीन मुकदमे दर्ज हैं। 

दुष्कर्म की पुष्टि फॉरेंसिक जांच से होगी 

एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी स्लाइड तैयार कराकर जांच के लिए आगरा की फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। 

असंवेदनशील और गैरजिम्मेदार पुलिस

बालिका के 30 मई को गायब हो जाने के बाद परिजन थाने पहुंचे। वहां पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। इंस्पेक्टर केपी सिंह चाहल ने लौटा दिया। अगले दिन मासूम की गुमशुदगी दर्ज हो सकी। घटना के तीन दिन बाद शव मिला तो भी इंस्पेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। गुस्साए ग्रामीणों ने थाना टप्पल के सामने बच्ची का शव रख दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर घंटों जाम लगाया था। इस लापरवाही पर इंस्पेक्टर चाहल को लाइन हाजिर कर दिया गया था। इसके बाद केपी सिंह चाहल, दारोगा सत्यवीर सिंह, अरविंद कुमार व शमीम अहमद, सिपाही राहुल यादव को निलंबित कर दिया गया था।

 नहीं कराए डीएनए टेस्ट

विशेषज्ञों के अनुसार पुलिस ने आरोपितों की पहचान के लिए डीएनए जांच की पहल नहीं की। इससे आरोपितों को आगे बचने का मौका मिल सकता है।

 

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Posted By: Mukesh Chaturvedi