जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा ने अधिकारियों को तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि तिलहनी फसलें अधिक होंगी तो तेल के बढ़ रहे दाम नियंत्रित हो सकेंगे। बुधवार को आयोजित वर्चुअल मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी में आयुक्त ने पराली प्रबंधन के लिए भी दिशा-निर्देश दिए। यह भी कहा कि किसानों के लिए खाद-बीज की कहीं किल्लत नहीं होनी चाहिए।

वर्चुअल गोष्ठी के लाइव प्रसारण का प्रबंध जिला मुख्यालय स्थित एनआइसी भवन में किया गया था। कृषि उत्पादन आयुक्त ने जिला स्तर पर एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्लान) तैयार कर उत्पादन को बाजार से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पराली का उपयोग गो संरक्षण केंद्रों में चारे के रूप में कराया जाए। कमिश्नर ने बताया कि मंडल में रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के हर संभव प्रयास हो रहे हैं। प्रदेश में खाद-बीज की कोई कमी नहीं है। 96 फीसद से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान हो चुका है। डीएम सेल्वा कुमारी जे. ने पराली प्रबंधन के लिए चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी। उप कृषि निदेशक यशराज सिंह ने बताया कि जनपद में 2.50 लाख हेक्टेअर में खाद्यान्न व तिलहन की खेती होती है। 2,24,788 हेक्टेअर में गेहूं, 25,540 हेक्टेअर में सरसों और 29,728 हेक्टेअर में जौ की बोआई रबी में होनी है। पिछले वर्ष गेहूं का 41.82 कुंतल प्रति हेक्टेअर और सरसों का 17.12 कुंतल प्रति हेक्टेअर उत्पादन हुआ। इसमें वृद्धि करते हुए गेहूं 43.42 कुंतल प्रति हेक्टेअर व सरसों 17.69 कुंतल प्रति हेक्टेअर उत्पादन का लक्ष्य मिला है। रबी में 1,04,557 कुंतल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष 94,494 कुंतल बीज बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध करा दिया गया है। गोष्ठी में सीडीओ अंकित खंडेलवाल, जिला कृषि अधिकारी राम प्रवेश समेत कृषि, सिचाई व अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

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