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एएमयू छात्रसंघ चुनाव: 'नारी शक्ति' का जलवा, उपाध्यक्ष पर इशरा नईम सहित कई छात्राओं ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

Published: Sat, 07 Nov 2026 12:53 PM (GMT+05:30)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं ने रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी कर कई पदों पर जीत हासिल की है। ...और पढ़ें

जीत का निशान दिखातीं आयशा खान, उपाध्यक्ष, स्टूडेंट यूनियन वीमेंस कॉलेज। अनम रियाज, अध्यक्ष, स्टूडेंट यूनियन, वीमेंस कॉलेज एएमयू।

जीत का निशान दिखातीं आयशा खान, उपाध्यक्ष, स्टूडेंट यूनियन वीमेंस कॉलेज। अनम रियाज, अध्यक्ष, स्टूडेंट यूनियन, वीमेंस कॉलेज एएमयू।

HighLights

  1. छात्राओं ने एएमयू छात्रसंघ चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज की।

  2. इशरा नईम बनीं पहली महिला उपाध्यक्ष, रचा नया इतिहास।

  3. 16 साल बाद अध्यक्ष पद पर महिला प्रत्याशी ने दावेदारी की।

संतोष शर्मा, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रसंघ चुनाव में इस बार नारी सशक्तिकरण की मजबूत झलक देखने को मिली। आठ साल बाद हुए चुनाव में छात्राओं ने न सिर्फ बढ़-चढ़कर भागीदारी की, बल्कि अलग-अलग पदों पर जीत दर्ज कर छात्र राजनीति में अपनी बढ़ती ताकत का अहसास भी कराया। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं ने छात्रसंघ के विभिन्न पदों पर जीत हासिल की है।

अध्यक्ष पद के चुनाव में 16 साल बाद किसी महिला प्रत्याशी ने दावेदारी की तो उपाध्यक्ष पद पर भी महिला प्रत्याशियों की भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा। इशरा नईम ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर नया इतिहास रच दिया। वह इस पद पर निर्वाचित होने वाली पहली महिला बनी हैं।

16 साल बाद अध्यक्ष पद के चुनाव में उतरी महिला प्रत्याशी

इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर आमिना इरशाद ने अपनी दावेदारी पेश की। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर भी नशरा नईम और इरफा खान मैदान में थीं। इससे पहले छात्रसंघ की राजनीति में महिलाओं की मौजूदगी इतनी प्रभावी नहीं रही थी। इस बार छात्राओं ने चुनाव लड़ने से लेकर जीत हासिल करने तक अपनी मजबूत भागीदारी दिखाई।

खास बात यह रही कि छात्रसंघ की कैबिनेट में भी पांच छात्राओं ने जगह बनाई। इनमें हानिया खान, अरीबा दिलशाद, शाजिया शमीम, अनिका रुम्मान राही और शाहीन परवीन शामिल हैं। इसके अलावा एएमयू कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों में फैकल्टी आफ यूनानी मेडिसिन से आमिना फैजान और फैकल्टी आफ कामर्स से इलमा मशरूफ ने जीत दर्ज की।

उपाध्यक्ष पद पर रचा इतिहास, कैबिनेट और कोर्ट में भी छात्राओं की मौजूदगी

एएमयू के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राहत अबरार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं का जीतकर आना विश्वविद्यालय के लिए अच्छा संकेत है। छात्राएं अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और उनके लिए आगे आकर आवाज उठा रही हैं। छात्रसंघ में उनकी बढ़ती भागीदारी दूसरी छात्राओं को भी आगे आने और नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करेगी। यह बदलाव विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में महिलाओं की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाता है।

विद्यार्थियों के कल्याण के लिए काम करेगी यूनियन : कुलपति

कुलपति प्रो. नईमा खातून ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों, कैबिनेट सदस्यों और एएमयू कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। निष्पक्षता और सावधानी के साथ चुनाव संपन्न कराने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, प्राक्टर, संकायों के डीन और विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों का भी आभार जताया। उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित प्रतिनिधि ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ अपने साथी विद्यार्थियों के कल्याण के लिए काम करेंगे।

पहली बार कोर्ट मेंबर बन रचा इतिहास

1981 से शुरु हुए छात्र कोटा से कोर्ट मेंबर के चुनाव के लिए अभी तक कोई महिला प्रत्याशी नहीं जीती थी। इस बार यह मिथक भी टूट गया। आमिना फैजान और इलमा मशरूफ ने जीत दर्ज कर सबको चोका दिया।

यह भी पढ़ें- एएमयू छात्र संघ चुनाव: अध्यक्ष पद के लिए अमीना इरशाद मैदान में, बोलीं- जमीन वापस लेकर आऊंगी

142 साल पुरानी बहस की परंपरा से निकला छात्र नेतृत्व

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्र राजनीति की जड़ें केवल छात्रसंघ चुनाव तक सीमित नहीं हैं। यहां वाद-विवाद और लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा करीब 142 साल पुरानी है। वर्ष 1884 में तत्कालीन मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल (एमएओ) कालेज में स्थापित सिडन्स यूनियन क्लब ने विद्यार्थियों को अपनी बात रखने, तर्क करने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का मंच दिया था। कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी की तर्ज पर 26 अगस्त 1884 को स्थापित यह क्लब कालेज में छात्र वाद-विवाद का प्रमुख केंद्र बना। उस दौर में क्लब के अध्यक्ष कालेज के प्रिंसिपल हुआ करते थे।

छात्र प्रतिनिधियों का चयन लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता था

विद्यार्थियों के बीच से उपाध्यक्ष और सचिव का चुनाव होता था। वर्ष 1920 में विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद कुलपति क्लब के अध्यक्ष बने और उपाध्यक्ष तथा सचिव के पदों पर विद्यार्थियों का चुनाव जारी रहा। यानी शुरुआत में विश्वविद्यालय प्रशासन के शीर्ष पदाधिकारी अध्यक्ष की भूमिका निभाते थे, जबकि छात्र प्रतिनिधियों का चयन लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता था।

छात्रसंघ के इतिहास में वर्ष 1951 महत्वपूर्ण माना जाता है। देश के तीसरे राष्ट्रपति और एएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. जाकिर हुसैन के प्रयासों से यूनियन के ढांचे में बदलाव किया गया। इसके तहत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव तीनों पदों पर विद्यार्थियों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की व्यवस्था की गई। कुलपति को यूनियन का संरक्षक बनाया गया। इस बदलाव के बाद छात्रसंघ के शीर्ष पदों पर विद्यार्थियों के नेतृत्व की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक कायम है।

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