हाथरस, जागरण संवाददाता। भारत सरकार के न्याय विभाग एवं राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत कानूनी प्रक्रिया को आमजन तक आसानी से एवं सुगम तरीके से पहुंच जाए। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के सीएससी इ-गवर्नेंस के माध्यम से नया नवाचार किया है। अभी तक लोगों को कानूनी सलाह प्राप्त करने के लिए वकील के पास जाने की जरूरत होती थी, साथ ही हर जगह पर वकील की उपलब्धता भी नहीं हो पाती थी। इसको देखते हुए केंद्रीय न्याय विभाग ने सीएससी इ-गवर्नेंस के माध्यम से इस योजना को लागू किया है जिसमें सूचना एवं संचार तकनीकी का इस्तेमाल करके दिल्ली के एक्सपर्ट वकील और जरूरतमंद हितग्राहियों के बीच वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से संवाद कराया जा रहा है। कानूनी सलाह प्रदान की जा रही है। टेली ला योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था, अच्छे परिणाम को देखते हुए इसे सभी लागू कर दिया गया है।

यह है प्रक्रिया

सीएससी जिला प्रबंधक उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि टेली-ला के माध्यम से लाभ लेने के लिए हितग्राहियों को उनके गांव, पंचायत में उपस्थित सीएससी केंद्र जाना पड़ता है जहां पर सीएससी के पोर्टल के माध्यम से हितग्राही का आनलाइन पंजीयन होगा जिसमें नाम, उम्र,पता, फोन नंबर तथा समस्या का संक्षिप्त में वर्णन होगा और एक्सपर्ट से समय के लिए अपाइंटमेंट फिक्स कर लिया जा रहा है। एक्सपर्ट के द्वारा उस बुकिंग समय में हितग्राही को कानूनी सलाह वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से प्रदान की जा रही है। सीएससी के माध्यम से टेली ला योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही अपना कोई भी पता का पूफ्र, जन्मप्रमाण पत्र, दिव्यांग है तो उसका सर्टिफिकेट लेकर पंजीयन काराना पड़ रहा है।

टेली ला के माध्यम से शामिल प्रकरण

दहेज, पारिवारिक विवाद, तलाक, घरेलू हिंसा से बचाव, महिला, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन यौन दुव्र्यवहार, छेड़छाड़ पर। जमीन जायदाद व सम्पत्ति का अधिकार, महिला एवं पुरुषों के लिए समान मजदूरी, मातृत्व लाभ, भ्रू हत्या रोकथाम, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल मजदूरी, बच्चों के शिक्षा के अधिकार। गिरफ्तारी (गिरफ्तारी के बाद की प्रक्रिया, बिना वारंट गिरफ्तारी, जोर जबरदस्ती से गिरफ्तारी, महिला से पूछताछ, पुलिस हिरासत में यातना, एफआइआर प्रक्रिया, जमानती, गैर जमानती अपराध। जमानती प्रक्रिया, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के प्रति अत्याचार और पुन्निरवास पर।

Edited By: Anil Kushwaha