अलीगढ़ [जेएनएन]। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लेकर आई है। ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा सके। मगर पुराना पैटर्न व विषयों की ओर सरकार के नुमाइंदे ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। हस्तशिल्प ग्रंथ विषय अपनी अंतिम सांस ले रहा है। शहर स्थित केपी इंटर कॉलेज में ही इस विषय को पढ़ाया जा रहा है। यहां बिना पुस्तकों के बच्चों पढ़ रहे हैं। यह बाजार में भी उपलब्ध नहीं है। यूपी बोर्ड से इस बार सभी 28 बच्चे 12 वीं में पास हुए हैं। 40 बच्चे 11वीं से 12वीं पहुंच गए हैं। संसाधानों के अभाव में यह विषय तमाम स्कूलों में बंद हो गया है। आगरा, मथुरा व हाथरस में भी यह पढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रपिता महात्मागांधी यह सिलाई शिल्प, चर्म शिल्प, कास्ट शिल्प व हस्त शिल्प ग्रंथ विषय के जरिये रोजगार परक शिक्षा पर जोर देते थे।

हस्त शिल्प ग्रंथ में प्रैस, प्रिंटिंग, वाइडिंग, जिल्द, कटिंग सहित अन्य हस्तशिल्प से जुड़ी शिक्षा दी जाती थीं। एचबी इंटर कॉलेज, माहेश्वरी इंटर कॉलेज, कपी इंटर कॉलेज सहित अन्य कॉलेज में हस्तशिल्प ग्रंथ पढ़ाया जाता था। इन कॉलेजों में प्रयोगशालाएं भी थीं। बच्चों के अभाव में कॉलेज प्रबंधन का मोह भंग हो गया। बच्चों के अभाव में इस विषय की पढ़ाई ही बंद करा दी, जबकि इस विषय से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को एलटी ग्रेड का दर्जा मिलता है। शिक्षक के लिए बीएड व बीटीसी की जरुरत नहीं थी। अब बच्चे बिना पुस्तक के ही पढ़ाई कर रहे हैं। यह विषय हुब्बलाल इंटर कॉलेज आगरा, जवाहर इंटर कॉलेज मथुरा व डीआरवी इंटर कॉलेज हाथरस में पढ़ाया जा रहा है। पुस्तकें यहां भी नहीं है।

घटे नंबरों से आर्कषण हुआ कम

हस्त शिल्प ग्रंथ में पहले कक्षा 12वीं में प्रक्टीकल 100 नंबर का व थ्योरी भी 100 नंबर की होती थी। कुल विषय 100 नंबर का हो गया। जिसमें 30 नंबर के प्रक्टीकल व 70 नंबर की थ्योरी। इस विषय को आधुनिकता से जोड़ा। कंप्यूटर आदि की शिक्षा भी शामिल हुई।

हाथरस से प्रकाशित होती थी रेनू पुस्तक कला

डीआरवी इंटर कॉलेज हाथरस के प्रधानाचार्य व हस्तशिल्प ग्रंथ के प्रवक्ता रहे स्वतंत्र कुमार गुप्ता ने कहा कि पहले हस्तशिल्प ग्रंथ विषय की काफी उपयोगिता थी। इस विषय से 12वीं करने वाले छात्रों को सरकारी प्रैस व प्रकाशन में नौकरी मिल जाती थीं। खुद का व्यापार भी स्थापित होते थे। सरकार की अनदेखी से अर्श से फर्श पर इस विषय की लोकप्रियता को देखा है। मैने खुद अपनी रेनू पुस्तक कला के नाम से निकाली थीं। कुमुद प्रकाश मंदिर हाथरस नाम का खुद का प्रकाशन भी था। इस पुस्तक की 15 हजार से अधिक प्रतियां तीन संस्करणों में प्रकाशित की थीं। यह पश्चिम से लेकर पूर्वांचल के कई जिलों में सप्लाई की जाती थीं। इसी विषय ने अग्रवाल को वर्ष 2019 में राज्यपाल के हाथों सम्मानित कराया था। पुरुस्कारों के साथ गुप्ता की तीन साल के लिए सेवाएं बढ़ाई गई थीं। गुप्ता ने कहा कि कुमुद प्रकाशन के साथ कानपुर के नवीन प्रकाशन मंदिर ने भी शिल्प ग्रंथ पुस्तकों का प्रकाशन बंद कर दिया है।

छात्र को पुस्तक की जरुरत

केपी इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रवक्ता सुनील सक्सेना का कहना है कि हस्तशिल्प ग्रंथ विषय रोजगार परक शिक्षा देता है। आधुनिकता के इस दौर में अभिभावक व बच्चों का इस ओर आकर्षण कम हुआ है। इस लिए पुस्तक प्रकाशकों ने छह साल पहले किताब प्रिंट करना बंद कर दिया है। बच्चे अभी भी पढ़ रहे हैं। अचलताल पुस्तक बिक्रेतर अतुल मित्तल का कहना है कि हमने अपनी प्रतिष्ठान पर 300 से 350 तक ग्रंथ शिल्प की पुस्तकों के बेचा था। कानपुर व हाथरस के प्रकाशक पुस्तक भेजते थे। पिछले 10 साल से पुस्तक नहीं आईं। बच्चे पूछने जरुर आते हैं। माहेश्वरी क्रिएटिव क्लब संजय सक्सेना का कहना है कि पिछले सत्र में एक छात्र को पुस्तक की जरुरत हुई थीं। उसने मेरे से संपर्क किया था। तब मैं केपी इंटर कॉलेज के विषय प्रवक्ता सुनील सक्सेना के पास गया था। तब मेरी जानकारी में यह प्रकरण आया। चारों हस्तशिल्प या हस्तशिल्प ग्रंथ की पुस्तक होनी चाहिए।

Posted By: Parul Rawat

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