AMU छात्र संघ चुनाव, प्रत्याशियों के पांच मिनट के भाषण से तय होगी चुनावी दिशा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए मंगलवार को प्रत्याशियों के अंतिम भाषण हो रहे हैं, जो पांच नवंबर के ...और पढ़ें

AMU छात्र संघ चुनाव के लिए उत्साहित छात्र-छात्राएं।
HighLights
भाषणों का मुख्य विषय 'राष्ट्र निर्माण में छात्र नेतृत्व का योगदान'।
राष्ट्रीय राजनीति और स्थानीय छात्र मुद्दे भी रहेंगे चर्चा में।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) छात्रसंघ चुनाव में मंगलवार को प्रत्याशियों के अंतिम भाषण हो रहे हैं। यूनियन हाल की छत पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव पद के प्रत्याशी छात्र-छात्राओं के सामने अपनी बात रखेंगे। प्रत्येक प्रत्याशी को पांच मिनट का समय दिया गया है।
चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में पहुंच चुके प्रत्याशियों के लिए यह अपनी ताकत दिखाने और मतदाताओं को प्रभावित करने का सबसे अहम अवसर है। पांच नवंबर को होने वाले मतदान से पहले इन भाषणों को चुनाव की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
इस बार भाषण का विषय 'राष्ट्र निर्माण में छात्र नेतृत्व का योगदान' रखा गया है। हालांकि प्रत्याशियों के प्रचार और अब तक सामने आए बयानों को देखते हुए राष्ट्रीय राजनीति और विचारधारा से जुड़े मुद्दे भी भाषणों में हावी रहने के आसार हैं।
शरजील इमाम और उमर खालिद से लेकर सरकारी संस्थानों और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण तथा वीर सावरकर तक के नाम चुनावी चर्चा में आ चुके हैं। ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि प्रत्याशी इन मुद्दों को किस अंदाज में उठाते हैं और छात्रों के सामने अपना पक्ष किस तरह रखते हैं।
स्थानीय मुद्दों पर भी रहेगी नजर
राष्ट्रीय मुद्दों के बीच छात्रों से जुड़े सवाल भी प्रत्याशियों की परीक्षा लेंगे। छात्रावास, शैक्षणिक सुविधाएं, छात्र हित, विश्वविद्यालय में प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर प्रत्याशी क्या वादे करते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। एएमयू में लंबे अंतराल के बाद हो रहे छात्रसंघ चुनाव में छात्र नेतृत्व की भूमिका और विश्वविद्यालय के भविष्य को लेकर भी विचार सामने आने की उम्मीद है।
पांच मिनट में रखनी होगी बात
मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब के अनुसार, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव पद के प्रत्याशियों को पांच-पांच मिनट भाषण देने का समय निर्धारित किया गया है। इसके अलावा एक मिनट प्रश्न अथवा अन्य औपचारिकता के लिए रखा गया है। प्रत्याशी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू या अपनी पसंद की किसी भी भाषा में अपनी बात रख सकते हैं।
उन्हें ऐसे शब्दों और वाक्यों के इस्तेमाल से बचने की हिदायत दी गई है, जिनसे विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित हो या चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो।
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