100 रुपये में एक किलो नकली पनीर तैयार, लगता है इतना ‘असली’ पहचानना मुश्किल, दिल्ली-NCR तक हो रही सप्लाई
मिलावटखोर 100 रुपये प्रति किलो की लागत से नकली पनीर बनाकर दिल्ली-एनसीआर तक सप्लाई कर रहे हैं, जिससे प्रतिदिन लाखों का मुनाफा कमाया जा रहा है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।
HighLights
अलीगढ़ में 100 रुपये में बन रहा मिलावटी पनीर।
दिल्ली-एनसीआर तक प्रतिदिन 5000 किग्रा से अधिक सप्लाई।
सेहत के लिए गंभीर खतरा, 80% नमूने जांच में फेल।
सुरजीत पुंढीर, अलीगढ़। जिले में दूध का भरपूर उत्पादन होने के बावजूद मिलावटखोर इसी कारोबार में जहर घोलकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। खैर व गभाना के कई गांवों में महज 100 रुपये प्रति किग्रा की लागत से तैयार मिलावटी पनीर दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचाया जा रहा है।
असली के नाम पर 250 से 300 रुपये किग्रा तक बिकने वाले इस पनीर के दो साल में 80 प्रतिशत नमूने जांच में फेल आए हैं। 10 कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित होने और पुलिस को सूची सौंपने के बाद भी काला कारोबार जारी है।
प्रतिदिन पांच हजार किग्रा से अधिक पनीर की आपूर्ति के दावे के बीच सवाल है कि छापामारी व कार्रवाई के बावजूद मिलावटखोरों का नेटवर्क क्यों नहीं टूट रहा है?
खैर व गभाना क्षेत्र के सुदेशपुर, शाहपुर, सबलपुर, सहजपुरा, भोजाका व गणेशपुर समेत कई गांवों में मिलावट के मामले सामने आ चुके हैं। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पिछले डेढ़ वर्ष में कई कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित किए हैं, फिर भी मिलावट की शिकायतें आ रही हैं। कुछ लाइसेंस बहाल होने व नए नाम से जारी होने की भी चर्चाएं हैं।
एफएसडीए के सहायक आयुक्त-1 दीपक सिंह का कहना है कि मिलावट को लेकर विभाग सख्त है। लगातार निगरानी के साथ छापामारी की जाती है और लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं।
पनीर की रोजाना आपूर्ति
एफएसडीए के जानकारों के अनुसार, संबंधित गांवों से प्रतिदिन औसतन 50 कुंतल यानी पांच हजार किग्रा पनीर बाहर भेजा जाता था। इसकी आपूर्ति दिल्ली-एनसीआर के बाजारों के साथ होटल, रेस्टोरेंट, माल और अन्य प्रतिष्ठानों में की जाती थी। करीब 100 रुपये प्रति किग्रा की लागत से तैयार पनीर 250 से 300 रुपये किलो तक बेचे जाने की बात सामने आई है।
100 रुपये की लागत और 250 रुपये की बिक्री कीमत के आधार पर प्रति किलो 150 रुपये का अंतर है। इस हिसाब से पांच हजार किग्रा पनीर की बिक्री पर प्रतिदिन 7.50 लाख रुपये का संभावित अंतर बनता है। महीने में यह रकम दो करोड़ रुपये से अधिक होती है।
ऐसे तैयार किया जा रहा था मिलावटी पनीर
मिलावटखोरों ने पनीर बनाने के पारंपरिक तरीके को बदल दिया है। जानकारों के अनुसार, कुछ मामलों में थोड़े से दूध में सोडियम बाइकार्बोनेट यानी बेकिंग सोडा मिलाया जाता था। इसके बाद पॉम ऑयल या वेजिटेबल ऑयल डालकर मिश्रण को बेकिंग पाउडर से फाड़ा जाता था। फिर बड़े कंटेनरों में जमाकर पनीर का आकार दे दिया जाता था।
कुछ मामलों में दूध की जगह सिंथेटिक दूध के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। डिटर्जेंट पाउडर, रिफाइंड, स्टार्च और अन्य रसायनों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। देखने में असली जैसा लगने के कारण सामान्य उपभोक्ता के लिए इसकी पहचान करना मुश्किल है।
50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 12 लाख पशु हैं। इनमें नौ लाख भैंस और तीन लाख गाय हैं। लगभग सात लाख गाय-भैंस प्रतिदिन दूध देती हैं। प्रति पशु औसतन सात से आठ लीटर दूध मिलने के आधार पर करीब 50 लाख लीटर प्रतिदिन उत्पादन का अनुमान है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 310 मिलीलीटर दूध की जरूरत होती है। जिले की आबादी करीब 50 लाख है। ऐसे में पर्याप्त दूध होने पर भी मिलावट हो रही है।
सेहत के लिए गंभीर खतरा, सजा का भी प्रविधान
वृंदा हास्पिटल के फिजिशियन डाॅ. अमित वार्ष्णेय के अनुसार, दूषित खाद्य पदार्थ व मिलावटी पनीर खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द व फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। किडनी पर असर और कैंसर का खतरा भी कुछ हानिकारक रसायनों के संपर्क से जुड़ा हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों व कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम के तहत मिलावट की प्रकृति व उससे होने वाले नुकसान के आधार पर सजा का प्रविधान है। मिलावट से किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। अन्य मामलों में भी जुर्माना और कारावास का प्रविधान है।
