एएफआई के स्कैनर सिस्टम ने कसी नकेल, यूथ नेशनल एथलेटिक्स में उम्र में गड़बड़ी करने वाले एथलीट चिन्हित
एएफआई ने नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उम्र के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए स्कैनर सिस्टम लागू किया है। लुधियाना में ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
एएफआई ने नेशनल एथलेटिक्स में स्कैनर सिस्टम लागू किया।
लुधियाना चैंपियनशिप में चार एथलीट उम्र फर्जीवाड़े में पकड़े गए।
दोषी पाए जाने पर एथलीटों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरव दुबे, अलीगढ़। एथलेटिक्स फेडरेशन आफ इंडिया (एएफआई) ने देशभर में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए स्कैनर सिस्टम लागू किया है। इससे फर्जीवाड़े पर नकेल कसनी भी शुरू हो गई है। इस वर्ष एक से तीन सितंबर तक लुधियाना में यूथ नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप कराई गई। इसमें यूपी समेत कई राज्यों के एथलीट्स ने हिस्सा लिया।
मैदान में जाने से पहले हाल में स्कैनर से आधार कॉर्ड व चेस्ट नंबर स्कैन किए गए। इसमें यूपी समेत अन्य राज्यों के चार एथलीटों द्वारा उम्र में बदलाव करना पकड़ा गया। अधिकारियों ने चारों से बोन टेस्ट (हड्डी परीक्षण) कराने का शपथ पत्र लिखवाया। फिर इनको हिस्सा लेने दिया गया।
बोन टेस्ट में अगर ये दोषी सिद्ध हुए तो एएफआई सख्त कदम उठा सकती है। प्रतियोगिता से इनकी हिस्सेदारी रद करने, अगली तीन प्रतियोगिताओं में खेलने पर प्रतिबंध या आजीवन प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई हो सकती है। अधिक सख्ती की तो मुकदमा भी पंजीकृत करा सकते हैं। अब अलीगढ़ में एथलीट के लिए जागरूकता की पाठशाला लगाने का निर्णय जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने लिया है।
खिलाड़ियों को बताया जाएगा कि आधार कार्ड में बदलाव कराना हो तो उम्र में छेड़छाड़ न कराएं। जन्मवर्ष वही रखा जाए जो हाईस्कूल के अंकपत्र, नगर निगम या नगर पालिका से जारी प्रमाणपत्र में अंकित हो। उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शमशाद निसार ने कहा कि योग्य व पात्र एथलीट को उसका हक मिले और फर्जीवाड़ा रुके, इसके लिए एएफआई ने स्कैनर सिस्टम लागू किया है। इसके अच्छे व सफल परिणाम आने शुरू हो गए हैं।
टीम मैनेजर ने बताई आंखों देखी
यूथ नेशनल चैंपियनशिप के लिए यूपी टीम मैनेजर के तौर पर विवेक चौधरी (सचिव, जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन) खिलाड़ियों को ले गए थे। इन्होंने बताया कि उनके सामने एएफआई के अधिकारियों आधार कार्ड व चेस्ट नंबर स्कैन कर रहे थे। यूपी के एक व अन्य राज्यों के तीन एथलीट्स के दो-दो आधार कार्ड कंप्यूटर पर प्रदर्शित हो रहे थे। दोनों में जन्मवर्ष बदला हुआ था। खिलाड़ियों ने पूर्व से एक ही आधार कार्ड उपयोग करने का तर्क दिया। ऐसे में चारों से बोन टेस्ट कराने की सहमति ली गई। उसके बाद खेलने दिया गया। ये एएफआई की सतर्कता व बेहतर व्यवस्था के कारण संभव हो सका।
