जागरण संवाददाता, अलीगढ़: स्वास्थ्य विभाग में सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से कार्यरत 12 बीपीएम (ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर) एवं 11 एमसीटीसी (मदर्स एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम) ऑपरेटरों के समायोजन में खूब खेल हुआ है। सेवा प्रदाता एजेंसी को नोटिस दिए बिना अनुबंध खत्म कर अचानक समायोजन किया गया। खबर छपते ही संबंधित बाबू का पत्र सामने आया है, जिसमें खुद ही समायोजन व मानदेय से संबंधित प्रक्रिया में खामियां उजागर की गई हैं। केवल मौखिक आदेश पर ही मानदेय बनाने का पर्दाफाश हुआ है। देखना ये है कि नवागत सीएमओ इस मामले में अब क्या रुख अपनाते हैं?

ये है मामला: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दो साल पूर्व सेवा प्रदाता कंपनी बलिराजा समाज कल्याण समिति के माध्यम से 12 बीपीएम (हर ब्लॉक पर एक) व 11 एमसीटीएस डाटा इंट्री ऑपरेटर्स को विभाग में सीधे समायोजित कर लिया गया। न कोई विज्ञापन निकाला गया और न कोई साक्षात्कार। जबकि, ऑपरेटर के समायोजन का तो कोई प्रावधान ही नहीं है। बीपीएम का समायोजन में भी वही प्रक्रिया अपनाई जानी थी, जो नई नियुक्ति में अपनाई जाती है। मगर सरकारी तंत्र ने नियमों पर नश्तर चलाकर यह संभव कर दिया। एजेंसी को नहीं मिला नोटिस : सेवा प्रदाता एजेंसी के संचालक टीकम सिंह ने बताया कि अधिकारियों ने दिसंबर में अचानक मेरे 23 कर्मचारियों का समायोजन विभाग में कर दिया, मुझे जानकारी तक नहीं हुई। जबकि, अनुबंध खत्म करने का कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। समायोजन में लाखों रुपये की वसूली हुई है। बाबू ने किया बचाव: एनएचएम के प्रधान सहायक चैनसुख वर्मा ने बुधवार को दैनिक जागरण में इस आशय की खबर छपते ही सीएमओ को पत्र लिखा। इसमें स्वीकार किया है कि मानदेय निकालने के लिए कोई पत्रावली या स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए। समायोजन की प्रक्रिया में मेरी कोई भूमिका नहीं रही। आपने (सीएमओ) मौखिक आदेश देकर तीन माह का मानदेय बनवाया, मगर अप्रैल 2018 से मानदेय जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन से ही संभव होगा, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की कृपा करें।

यदि सेवा प्रदाता एजेंसी के तहत कार्यरत कर्मियों का समायोजन हो गया है, तो गलत है। अब लखनऊ से नियुक्ति का प्रावधान है। मामले को दिखवाऊंगा कि क्या अनियमितता हुई है।

- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ

Posted By: Jagran

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