आगरा, प्रभजोत कौर। तबले की संगत भी है, सितार की तान भी है, गायक के सुर भी हैं और हारमोनियम से निकले सुर भी हैं, पर कलाकार मायूस हैं। कोरोना वायरस संक्रमण काल में हर काम की तरह वर्चुअल दुनिया में पहुंचे संगीत ने विस्तार तो बहुत दिया है, पर संतुष्टि और रोजगार नहीं दिया। दर्शकों के सामने बैठकर प्रस्तुति देने और अपने घर के कमरे में बैठकर स्वर लहरियां छेड़ने में बहुत अंतर है। इस संगीत दिवस पर आगरा के संगीतज्ञों ने कोरोना काल में वर्चुअल यानी ऑनलाइन हुई संगीत की दुनिया पर साझा किए अपने विचार-

कोरोना काल में संगीत कार्यक्रम रूके नहीं बस स्वरूप बदल गया जैसे शिक्षण कार्य ऑनलाइन हो रहा है। ऑनलाइन संगीत कार्यक्रमों में वो मजा नहीं जो मंच पर होने वाले कार्यक्रमों में आता था। इसके अलावा कलाकारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हुआ। आगरा के कई होटलों से जुड़ कर संगीत क्षेत्र के कलाकार अपना घर चला रहे थे। होटल बंद हुए थे तो काम भी बंद हो गया। हर कलाकार अपडेट नहीं है कि ऑनलाइन ट्यूशन ले सके। हम कलाकारों के लिए संगीत योग है, यही वो माध्यम है, जो हमें ईश्वर के नजदीक ले जाता है। यह समझ लीजिए कि ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता अब वर्चुअल हो गया।- डा. नीलू शर्मा, सदस्य, राष्ट्रीय कथक संस्थान

ऑनलाइन और मंच में बहुत अंतर है। यह अंतर हर उस कलाकार ने महसूस किया, जिसने ऑनलाइन संगीत कार्यक्रमों में शिरकत की। मंच पर प्रस्तुति देने में कलाकार सीधा अपने दर्शकों से जुड़ता है। उनके भाव समझता है। ऑनलाइन कार्यक्रमों में यह मुमकिन नहीं है। घर के कमरे में बैठकर प्रस्तुति देने में मजा नहीं आता।- गिरधारी लाल शर्मा, तबला वादक

संगीत ऐसा माध्यम है, जो आपको आपकी परेशानियों से दूर करता है, मानसिक शांति देता है। यह बात सही है कि ऑनलाइन संगीत कार्यक्रमों में वो मजा नहीं है पर कलाकार सक्रिय रहे। ऑनलाइन में आर्थिक परेशानियां दूर नहीं हुईं पर साधना जरूर हुई। कलाकारों के सामने कोरोना काल में आर्थिक संकट जरूर खड़ा हो गया है।- प्रेरणा तलेगांवकर, संगीतकार

अचानक से जीवन में कोरोना वायरस के आने से जो नकारात्मक परिवर्तन हुआ है वह निश्चित ही चिंतनीय है। कोरोना काल में आई नकारात्मकता को दूर करने के लिए संगीत कला से जुड़े कलाकारों ने आशा का संचार करने के लिए उनके जीवन में रंग भरने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयत्न किए। हालांकि ऑनलाइन कार्यक्रमों से काफी सहयोग मिला है। संगीत के माध्यम से अवसाद को दूर किया जा सकता है लेकिन साथ में संगीत से जुड़े उन कलाकारों की सहायता की भी अत्यंत आवश्यकता है, जिन्होंने संगीत को ही अपनी रोजी रोटी का माध्यम बना रखा था सरकार की ओर से उनको सहायता अवश्य मिलनी चाहिए।- निशिराज, गायिका

Edited By: Prateek Gupta