आगरा, जागरण संवाददाता। नारी संरक्षण गृह से दो साल पहले फर्जी जमानतदारों को सौंपी गई छह संवासनियों को आगरा में जिस्मफरोशी के अड्डों पर रखा गया था। कई महीने से इन अड्डों की रेकी कर रही एक संस्था ने पुख्ता सबूत जुटाए थे। इसके बाद शुक्रवार को पुलिस के साथ रेस्क्यू करके 32 महिलाओं और युवतियों को मुक्त कराया। मगर, जिन संवासिनियां की तलाश में गए थे, वह नहीं मिलीं। आशंका है कि कार्रवाई के दौरान वह चकमा देकर बच निकलीं।

इलाहाबाद के मीरगंज इलाके से एक मई 2016 में गुडिय़ा संस्था और पुलिस ने जिस्मफरोशी के अड्डों पर संयुक्त रूप से रेस्क्यू किया था। वहां से मुक्त कराई गई युवतियों, महिलाओं और बच्चों को आगरा के नारी संरक्षण गृह में भेजा गया था। जून 2017 में इनमें से 43 संवासिनी और आठ बच्चों को फर्जी जमानतदारों को सौंप दिया गया। मामले में नारी संरक्षण गृह की तत्कालीन अधीक्षिका गीता राकेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।

जमानतदारों को सौंपी गई इन युवतियों में अधिकांश को पुलिस अब तक नही खोज सकी है। गुडिय़ा संस्था के पदाधिकारी एवं अधिवक्ता गोपाल कृष्ण ने बताया कोतवाली और छत्ता में जिस्मफरोशी के अड्डों पर छह युवतियों के होने की जानकारी मिली थी। संस्था की रेस्क्यू टीम के सदस्यों द्वारा इन अड्डों की कई महीने तक रेकी की गई। इनमें कुछ युवतियों के फोटो भी उनको मिल गए थे। इससे फर्जी जमानतदारों को सौंपी गई युवतियों के आगरा में जिस्मफरोशी के अड्डों पर होने की सूचना पुख्ता हो गई। इन युवतियों को बरामद करने के लिए ही शुक्रवार को कार्रवाई की गई। रेस्क्यू में 32 महिलाओं और युवतियों को बरामद किया गया। मगर, जिन युवतियों को बरामद करने के लिए छापा मारा गया, वह चकमा देकर निकल गईं।

सीओ कर रहे हैं जांच

नारी संरक्षण गृह से फर्जी जमानतदारों को सौंपी गई युवतियों के मामले की जांच तत्कालीन सीओ छत्ता रितेश कुमार सिंह द्वारा की गई। इस दौरान चार युवतियों को बरामद किया गया।

 

Posted By: Tanu Gupta

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