आगरा, सुबान खान। माह-ए-रमजान में इबादत के सिलसिले से मस्जिदें आबाद हैं। कहीं पुरुषों से तो कहीं ख्वातीन (महिलाएं) की सफें(कतार) लगी होती हैं। हर शख्स अल्लाह के जिक्र के साथ इबादत का सफर तय कर रहा है। जुमा की नमाज से लेकर तरावीह और ईद की नमाज तक महिलाएं भी पुरुषों की तरह मस्जिदों में अदा कर रही हैं। आगरा की छह मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है।

पाक महीना पूरी होने में अब चंद दिन बचे हैं। हर तरफ ईद को लेकर तैयारियां चल रही हैं। रोजेदार ईद का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सिकंदरा स्थित शम्शी कालोनी की मस्जिद हुदा, नहरी वाली मस्जिद, जगदीशपुरा के सैफी नगर में इब्राहीम मस्जिद, लोहामंडी की अबु बकर, राजामंडी की रफी उज जमा, कक्कु गली की मस्जिद में चार वक्त की नमाज महिलाएं अदा करती हैं। सुबह सहरी के बाद फज्र की नमाज अदा करती हैं। जुमा के दिन जुमा की नमाज और तरावीह की नमाज मे महिलाएं मस्जिद आबाद करती हैं। इन मस्जिदों में करीब पांच सौ से अधिक महिलाएं इबादत करती हैं।

ख्वातीन के लिए मस्जिद में जाने का रास्ता भी अलग

शम्शी कालोनी निवासी शमरीन रहमान बताती हैं कि हुदा मस्जिद में नमाज अदा करने जाती हैं। यहां पर ख्वातीन के लिए मस्जिद में जाने का रास्ता अलग होता है। इनका वजू के इंतजाम भी अलग होते हैं।

तीन जगह होती है ईद की नमाज

शहर में महिलाएं ईद की नमाज तीन जगह अदा करती हैं। इसमें सिकंदरा की शम्शी कालोनी पार्क, जलाल बुखारी मैदान ताजगंज और मस्जिद इब्राहीम है।

सदियों से पढ़ रही नमाज

इमाम सलीम बताते हैं कि करीब पचास वर्ष से महिलाएं नमाज अदा कर रही हैं। वहीं, हाफिज मुख्तार अहमद बताते हैं कि मस्जिद इब्राहीम में भी वर्ष 1999 से ख्वातीन की नमाज का सिलसिला जारी है।

ये ईद की नमाज का वक्त

-शम्शी कालोनी के पार्क में सुबह 7:30 बजे।

- ताजगंज जलाल बुखारी मैदान में सुबह 7:30 बजे।

-मस्जिद इब्राहीम में सुबह 7:30 बजे।

50 सालों से चल रहा है सिलसिला

आगरा की छह मस्जिदों में महिलाएं जुमा और तरावीह की नमाज अदा करती हैं। यह सिलसिला करीब पचास वर्ष से चल रहा है। मस्जिदों में पुरुष और महिलाएं का रास्ता भी अलग होता है।

हाजी इकबाल, अध्यक्ष, इस्लामिक पीस एंड डवलपमेंट फाउंडेशन  

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Posted By: Prateek Gupta