आगरा, जागरण संवाददाता। महिलाएं ईटिंग डिसऑर्डर की शिकार हो रही हैं। वे खाना खाने के बाद उल्टी करती हैं, कुछ महिलाएं खाना ही नहीं खाती हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ बायोलॉजिकल साइक्यिाट्री की कार्यशाला में दूसरे दिन शनिवार को ओसीडी, स्क्रिजोफ्रेनिया, बाइपोलर मूड डिसऑर्डर सहित अन्य बीमारियों के इलाज पर चर्चा की गई।

डॉ. अरुणा यदवाल, कर्नाटक ने महिलाओं में बढ़ रहे ईटिंग डिसऑर्डर पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि 15 से 25 साल की उम्र की महिलाएं ईटिंग डिसऑर्डर की शिकार हो रहीं हैं। स्लिम दिखने के लिए वजन कम करने को अलग-अलग तरह के विकल्प अपना रहीं हैं, भूख रोक नहीं पातीं, इसलिए खाना खाती हैं। इसके बाद उल्टी कर देती हैं। कुछ महिलाएं खाना ही नहीं खाती हैं, यह एनोरेक्सिया बुलीमिया और नर्वोसा से पीडि़त होती हैं। दवाएं और काउंसिलिंग से इलाज किया जा रहा है।

नियोमी फाइनवर्ग, इंग्लैंड ने ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (ओसीडी ) पर बताया कि बार-बार हाथ धोने, एक ही रास्ते पर बार-बार जाते हैं, यह समस्या बढ़ रही है। प्रारंभिक अवस्था में ही ओसीडी का इलाज होने से मरीज बेहतर जिंदगी जी सकते हैं। आयोजन अध्यक्ष डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि बाइपॉलर मूड डिसऑर्डर की समस्या भी बढ़ रही है, इसमें भी दवाएं और काउंसिलिंग से इलाज किया जाता है। समापन समारोह में शोधार्थियों को सम्मानित किया गया। सचिव डॉ. अनिल गौर, डॉ. एसपी गुप्ता, डॉ. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद रहे।

तनाव में जिंदगी जी रहे 26 फीसद युवा

डॉ. राहुल गुप्ता, ऑस्ट्रेलिया ने बताया कि 26 फीसद युवा तनाव में जिंदगी जी रहे हैं। इन्हें नकारात्मक विचार आते हैं, अभद्र व्यवहार करने लगते हैं, यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। जीवनशैली में बदलाव और तनाव मुक्त जिंदगी से इससे बच सकते हैं।

स्क्रिजोफ्रेनिया के मरीजों के लिए इंजेक्शन

डॉ. एडवर्ड पी, स्पेन ने बताया कि स्क्रिजोफ्रेनिया में याददाश्त कमजोर हो जाती है, इसमें दिमाग में प्रोटीन जमने से समस्या बढऩे लगती है। मगर, अधिकांश मरीज बीच में इलाज छोड़ देते हैं, इससे समस्या और बढ़ रही है। इन मरीजों में इंजेक्शन लगाए जा सकते हैं, इसके रिजल्ट अच्छे हैं।

शरारती बच्चे डिसऑर्डर के शिकार

डॉ. सागर लवानिया ने बताया कि कुछ बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते हैं, लेकिन शरारत बहुत करते हैं। ये हाइपर एक्टिविटी के शिकार होते हैं, इलाज से ये ठीक हो सकते हैं।  

Posted By: Tanu Gupta

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