आगरा, जागरण संवाददाता। रेलवे ने जल बचाने के लिए शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों को मिलने वाले पानी में कटौती कर दी है। मगर, दूसरी तरफ स्टेशन पर पानी की बर्बादी हो रही है। सैकड़ों लीटर पानी नालियों में बह रहा है। इसकी तरफ रेलवे का ध्यान नहीं है।

पिछले दिनों रेलवे बोर्ड ने शताब्दी एक्सप्रेस में पांच घंटे से ज्यादा यात्रा करने वाले यात्रियों को भी आधा लीटर पानी की बोतल देने का नया नियम शुरू किया। इसके पीछे तर्क था कि अधिकांश यात्री बोतल में पानी छोड़ देते हैं, जिससे पानी की बर्बादी होती है। रेलवे ने यात्रियों को मिलने वाली पानी में तो कटौती कर दी, लेकिन स्टेशन पर पानी की बर्बादी रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। आगरा कैंट स्टेशन पर ही हर दिन सैकड़ों लीटर पानी नालियों में बह जाता है। स्टेशन पर ट्रेनों में पानी भरने के लिए लगे नलों से पानी हमेशा रिसता रहता है। रविवार को आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ट्रेन में पानी भरने वाले पाइप से पानी बह रहा था। यह केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि अधिकांश पर पानी की बर्बादी होती है। रेलवे के पीआरओ एसके श्रीवास्तव का कहना है कि पानी की बर्बादी रोकने को हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रेनों में पानी भरने के बाद नल बंद करने को कर्मचारी तैनात रहते हैं। यात्रियों को रास नहीं आया नियम

शताब्दी में आधा लीटर पानी कम करने का रेलवे का नियम यात्रियों को रास नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि कम लोग ही ऐसे होते होंगे जो पांच घंटे के सफर में एक लीटर पानी न पी पाते हों।

Posted By: Jagran

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