जागरण संवाददाता, आगरा: जेठ का महीना है और गर्मी चरम पर है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र के उन लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो दो मई को आए तूफान से प्रभावित हुए थे। सरकार ने मृतक आश्रित परिवारों को तो मुआवजा दे दिया। लेकिन जिनका नुकसान हुआ था, पशुबाड़े ध्वस्त हो गए थे और टिनशेड टूट गए थे। उनके जख्म आज भी ताजा हैं, उन पर धूप से बचने के संसाधन भी नहीं रहे। वे दूर-दराज जाकर छाया में पशुओं को दिनभर रख रहे हैं। जबकि शासन-प्रशासन को इनकी चिंता नहीं है।

दो मई को आए तूफान से जिले में आधा सैकड़ा से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी। हजारों पेड़ टूट गए थे, मकानों और पशुबाड़ों के टिनशेड ध्वस्त हो गए थे। इससे प्रभावित ग्रामीणों के सामने धूप से बचने का संकट पैदा हो गया। न तो वे खुद धूप से बच पा रहे हैं और न ही पशु। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसलिए वे टिनशेड आदि की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। गांव अंगूठी निवासी किसान रनवीर सिंह सोलंकी ने बताया तूफान से उनके पशुबाड़े के टिनशेड ध्वस्त हो गए थे। तब से पशुओं को दिन में कभी दूसरों के यहां बांधते हैं तो कभी सड़क किनारे खड़े पेड़ों के नीचे। किसान नारायन सिंह का कहना है कि ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं को भी उचित छाया नहीं मिल रही, उन्हें भी धूप की तपिश का सामना करना पड़ रहा है। गांव कुकथला के किसान दिलीप चौधरी ने बताया कि पहले गांव के लोग गर्मियों के दिनों में बागों में दिन बिताते थे। लेकिन तूफान ने बागों के बड़े पेड़ों को उखाड़ दिया, बाग उजड़ से गए हैं। छाया के साधन उजड़ जाने से कई किसानों ने अपने पशु बेच दिए हैं।

Posted By: Jagran

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