शिक्षा विभाग की ट्रांसफर लिस्ट में अजब-गजब कारनामा: सहायक शिक्षक को बनाया बीईओ, बाद में आदेश सुधारा
बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षाधिकारियों के स्थानांतरण सूची में आगरा के एक सहायक शिक्षक कर्ण सिंह धाकड़ को गलती से बीईओ दर्शाकर वाराणसी स्थानांतरित कर दिया गया।

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
कर्ण सिंह धाकड़, सहायक शिक्षक, बीईओ सूची में गलत नाम।
स्थानांतरण आदेश में बड़ी चूक, शाम तक हुआ सुधार।
बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न।
जागरण संवाददाता, आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षाधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर सोमवार को जारी शासनादेश ने आगरा के शिक्षा महकमे में ऐसा प्रश्न खड़ा कर दिया, जिसका उत्तर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के पास भी तत्काल नहीं था।
शासन स्तर से जारी सूची में 95 नंबर पर कर्ण सिंह धाकड़ को आगरा में तैनात खंड शिक्षाधिकारी दर्शाते हुए वाराणसी स्थानांतरित कर दिया गया। जबकि हैरानी की बात रही कि आगरा में इस नाम का कोई खंड शिक्षाधिकारी तैनात ही नहीं है।
सूची में नगर क्षेत्र के शिक्षक कर्ण सिंह धाकड़ को दिखाया खंड शिक्षाधिकारी
सूची सामने आने पर शिक्षक संघ और विभाग से जुड़े लोग सक्रिय हो गए। जांच में सामने आया कि कर्ण सिंह धाकड़ नगर क्षेत्र के कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय धाकरान में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात हैं। वह पूर्व में एआरपी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके बावजूद शासन की बीईओ स्थानांतरण सूची में उनका नाम खंड शिक्षाधिकारी के रूप में कैसे पहुंच गया, यह प्रश्न अब बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
एक नाम सही, दूसरा बना रहस्य
शासन की सूची में आगरा से दो खंड शिक्षाधिकारियों के स्थानांतरण का उल्लेख था। इनमें रंजन गुप्ता का मेरठ स्थानांतरण सही था। लेकिन दूसरे नाम के तौर पर कर्ण सिंह धाकड़ को दर्शाए जाने से विभागीय अधिकारियों और शिक्षक संगठनों में खलबली मच गई। मामला सामने आते ही शिक्षक संगठनों ने सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके एक बीईओ ने स्थानांतरण रुकवाने के लिए सूची में कथित तौर पर यह हेराफेरी की है।
सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर उठे गंभीर प्रश्न
आरोप यह भी लगाए गए कि संबंधित बीईओ का नाम हटाकर एक शिक्षक का नाम शासन को भेजी गई सूची में शामिल कर दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
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शाम होते-होते शासन को सुधारना पड़ा आदेश
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मामला सामने आने के कुछ ही घंटों बाद शासन स्तर से संशोधित आदेश जारी कर दिया गया। संशोधित सूची में कर्ण सिंह धाकड़ का नाम हटा दिया गया और आगरा से केवल रंजन गुप्ता का स्थानांतरण मेरठ किया गया। इससे शुरुआती आदेश की त्रुटि तो स्पष्ट हो गई, लेकिन यह प्रश्न अब भी उठ रहा है कि एक सहायक शिक्षक का नाम बीईओ की स्थानांतरण सूची में आखिर किस स्तर पर और किन दस्तावेजों के आधार पर शामिल किया गया?
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पांच नए बीईओ आगरा आए
इसी स्थानांतरण प्रक्रिया में आगरा को पांच नए खंड शिक्षाधिकारी भी मिले हैं। इनमें कैलाश सिंह, विनोद कुमार, पंकज अग्रवाल, कमलेश कुमार और श्याम प्रकाश यादव शामिल हैं।
उठ रहे हैं यह प्रश्न
शासनादेश में हुई इस गंभीर चूक ने बेसिक शिक्षा विभाग की सूचनाओं और अभिलेखों के सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक शिक्षक को शासन की सूची में बीईओ बनाकर दूसरे जिले स्थानांतरित किया जा सकता है, तो सूची तैयार करने से पहले नाम, पद और तैनाती का सत्यापन किस स्तर पर हुआ? क्या शासन को भेजी गई मूल सूची में ही यह नाम दर्ज था या बीच की प्रक्रिया में बदलाव हुआ? और यदि बदलाव हुआ तो जिम्मेदारी किसकी है?
इन प्रश्नों के उत्तर अब बेसिक शिक्षा विभाग से अपेक्षित हैं। मामला सिर्फ एक गलत नाम का नहीं, शासन को भेजी जाने वाली संवेदनशील प्रशासनिक सूचनाओं के सत्यापन और पारदर्शिता से जुड़ा है।
