आगरा, निर्लोष कुमार। 188 दिनों के बाद सोमवार सुबह ताजमहल की तन्हाई टूटी। भोर की पहली किरण से अाधा घंटे पूर्व उसके दरवाजों पर लगा कोरोना रूपी ताला खुला। जहां कभी पर्यटकों को दुत्कार और धक्के मिलते थे, वहां सभी को वीआइपी ट्रीटमेंट मिला। संगमरमरी हुस्न के सरताज रोजा-ए-मुनव्वरा (ताजमहल) के दीदार कर पर्यटकों के चेहरे खिले हुए थे। ताजमहल भी अपने आंगन में 'वाह ताज' कहते कद्रदानों को देख आह्लादित था।

ताजमहल सोमवार सुबह खुला तो कोरोना काल की दहशत में माहाैल बदला हुआ, लेकिन सुरक्षित होने का अहसास कराने वाला था। गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग और रजिस्टर में एंट्री। टर्न स्टाइल गेट पर ऑनलाइन टिकट स्कैन करते ही हाथों और जूतों का सैनिटाइजेशन। पहले जहां सीआइएसएफ के जवान हाथों से छूकर पर्यटकों की जांच करते थे, वहां उनके हाथों में हैंड हेल्ड डिटेक्टर थे। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए वो जांच कर रहे थे। फोरकोर्ट में जमे रहने वाले फोटोग्राफरों के झुंड के बजाय चंद फोटोग्राफर थे। वीडियो प्लेटफार्म से नजर आती ताजमहल की छवि हमेशा के लिए मन में बस जाने वाली थी। वाटर चैनल पर साफ पानी और उद्यान में छाई हरियाली से ऐसा महसूस ही नहीं नहीं हुअा कि ताजमहल 188 दिनों के बाद खुला है। पर्यटक कम होने से माहौल में सुकून था। कोई शोर-शराबा नहीं, सिर्फ इत्मिनान। इस माहौल ने ताजमहल देखने पहुंचे पर्यटन से जुड़े लोगों को उन पुराने दिनों की याद दिला दी, जब ताजमहल में इतने पर्यटक नहीं होते थे। इत्मिनान के साथ पर्यटक ताज निहारते थे। पुराना दिन वहां बिता देते थे। तरक्की के साथ आवागमन के बढ़ते साधनों से ताजमहल पर पर्यटकों का बोझ बढ़ता ही गया। एक दौर ऐसा भी आया जब ताजमहल के कद्रदानों को उसके दीदार को जलालत झेलनी पड़ी। गेट के साथ ही स्मारक में धक्के खाए और बिना देखे ही लौटना पड़ा। अनलाॅक-4 में ताजमहल में लागू की गई कैरिंग कैपेसिटी ने पर्यटकों को सुकून दिया है। ताजमहल पर भी बोझ नहीं है।

सोमवार को ताजमहल देखने के बाद मुझे ऐसा एहसास हुआ, जैसे कि उसे पहली बार देखने पर होता है। 35 वर्ष पूर्व जब मैं पर्यटन कारोबार से जुड़ा था, तब ताजमहल में काफी सुकून महसूस होता था। कोविड काल में पहली बार ताजमहल खुलने पर वैसा ही महसूस हुआ। बीच में तो यहां आने पर पर्यटकों को धक्के खाने पड़े थे। पर्यटकों और पर्यटन के हित में ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे पर्यटक सुकून के साथ ताजमहल देख सकें।

-राजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष टूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा

35-40 वर्ष पूर्व ताजमहल देखने अाने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटकों की संख्या लगभग बराबर हुआ करती थी। सुपर फास्ट ट्रेनों के शुरू होने, हाईवे और एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी होने के साथ भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ती चली गई। ताज और आगरा के पर्यटन को बचाने को कोरोना काल में लागू की गई कैरिंग कैपेसिटी को स्थायी किया जाना चाहिए, भले ही पांच हजार से बढ़ाकर पर्यटकों की संख्या 10 हजार कर दी जाए।

-शमसुद्दीन, अध्यक्ष एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन 

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