आगरा, जागरण संवाददाता। एक शताब्दी की यादें समेटे बरगद का पेड़ पिछले साल आंधी में गिर गया था। पर उसके किस्से, यादें और उसकी ठंडक का एहसास आज भी है। जयपुर हाउस में रहने वाले संजय पुरसनानी कहते हैं कि वो सिर्फ पेड़ नहीं था, वो हमारे घर की पहचान था। संजय के घर के सामने ही लगभग 80 साल पुराना एक और बरगद का पेड़ है, जो आज भी अपनी छांव से गर्मी में राहत देता है। बरगद के पेड़ के लिए जगह काफी चाहिए होती है, जिसकी शहर में लगातार कमी हो रही है। इसीलिए महिलाएं गमलों में बरगद का पौधा लगाने का संकल्प ले रही हैं।

गर्मी का नहीं हुआ एहसास

जयपुर हाउस में रहने वाले संजय पुरुसनानी बताते हैं कि वे तीन भाई एक ही घर में रहते हैं। संजय का हिस्सा ऊपर का है, जब तक पेड़ था तब तक गर्मी का एहसास ही नहीं हुआ। पेड़ की छांव से इतनी राहत थी कि तापमान चाहे 48 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाए, पूरा घर ठंडा रहता था।आसपास के कई घरों तक इसकी छांव जाती थी। प्रकृति हमें खुले हाथों से सब देती है, पर हम कद्र नहीं करते। पिछले साल जब पेड़ टूटा, हमें उतना ही दुख हुआ जितना परिवार के एक सदस्य के जाने के बाद होता है। हम भाईयों ने संकल्प लिया है कि अपने पेड़ की याद में बरगद का पौधा लगाएंगे।

होश संभाला तब से देख रहा

लगभग 80 साल पुराने बरगद के पेड़ के सामने ही दुर्गा का मंदिर है। यहां के पुजारी आरडी शर्मा ने बताया कि जब से होश संभाला है, तब से ही इस पेड़ को देख रहा हूं। पिछले साल सबसे पुराना पेड़ गिर गया। बहुत दुख हुआ था। अब इस पेड़ ने जिम्मेदारी संभाली हुई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को इसी पेड़ से छांव मिलती है।

आयुर्वेद में है विशेष महत्व

बरगद की 800 प्रजातियां पूरे विश्व भर में पाई जाती हैं। बरगद के पेड़ के पत्ते से लेकर जड़ तक का इस्तेमाल दवाओं में होता है। आयुर्वेद चिकित्सक डा. कविता गोयल बताती हैं कि श्वेत प्रदर और डायबिटीज में बरगद के पेड़ की छाल का क्वाथ काफी उपयोगी है। ब्लीडिंग डिस्आर्डर में इसकी छाल का क्वाथ अन्य दवाओं के साथ दिया जाता है। बुखार या जलन होने पर भी छाल का क्वाथ दिया जाता है। आयुर्वेदिक औषधी सारीवासव व उषीरासव में बरगद का इस्तेमाल होता है। डायरिया, जहरीले कीड़े या सांप काटने पर बरगद की जड़ों को पीसकर पिलाने से लाभ मिलता है। इसका दूध भी लगाया जाता है।

बरगद बहुत गुणकारी है। मां इसके फायदे बताती थीं, इस साल मैंने संकल्प लिया है कि वट सावित्री के दिन गमले में ही बरगद का पौधा लगाऊंगी।- रितु गोयल, बल्केश्वर

मेरे घर में बरगद का पेड़ है। बहुत ज्यादा ठंडक रहती है। मैं इस साल अपनी कालोनी के बाहर भी बरगद का पौधा लगाऊंगी। कोरोना काल में पेड़ों की महत्ता से हम सभी वाकिफ हो चुके हैं।- नम्रता मिश्रा, दयालबाग

कोरोना काल में घर से बाहर निकलकर पूजा करने में भी डर लग रहा है। इसीलिए इस साल मैंने संकल्प लिया है कि घर पर गमले में ही बरगद का पौधा लगाऊंगी। इस पौधे को संभालूंगी। - अनुराधा गुप्ता, खंदारी

 

Edited By: Prateek Gupta