आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा में पुलिस और औषधि विभाग द्वारा दो सप्ताह पहले राजौरा बंधुओं की फर्म पर छापा मारकर एक्सपायर दवाओं के मामले का पर्दाफाश किया। वहां से 35 लाख रुपये की दवाएं बरामद कीं। मगर, आगरा में नकली और सैंपल की दवाओं का खेल दो दशक से पुराना है। उस समय खेल छोटे पैमाने पर था।मगर, आगरा में नकली दवाओं के बड़े खेल का पुलिस ने वर्ष 2007 में पर्दाफाश किया था। इसमें पुलिस ने तीन बोरी नकली दवाएं बरामद की थीं। इसके अगले ही वर्ष पुलिस ने नकली दवाओं की 91 बोरी बरामद कीं। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जाती है।

पुलिस ने मामले में कई मुकदमे दर्ज किए। इन सभी मुकदमों में आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए थे। इसके बाद पुलिस ने नकली दवाओं के मार्केट पर शिकंजा कसना शुरू किया। इस पर कारोबार से जुड़े दवा व्यापारियों ने भी अपना पैंतरा बदल दिया। उन्होंने नकली दवाओं की जगह सैंपल की दवाओं की खरीफरोखत का खेल शुरू कर दिया। इसमें भी लाखों के वारे न्यारे किये। पुलिस को दवा माफिया के इस खेल का पता चलने पर उसने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। सैंपल की दवाओं का जखीारा पकड़ा। इन दवाओं को शहर के विभिन अस्पताल और मेडिकल स्टाेरों में खपाना शुरू किया। इंस्पेक्टर कोतवाली राजेश पांडेय ने बताया कि कुल 14 मुकदमों में बरामद दवाओं को नष्ट कराया गया है।

मुकदमों से संबंधित नष्ट की गईं दवाओं का विवरण

वर्ष नष्ट की गईं दवाएं

1999 दो बंडल

1999 तीन बंडल

1999 दो बंडल

2006 एक बंडल

2007 तीन बोरी नकली दवाएं

2008 33 बोरी नकली दवाएं

2008 22 बोरी नकली दवाएं

2010 एक बंडल सैंपल की दवाएं

2011 35 बोरी सैंपल की दवाएं

2011 11 बोरी सैंपल की दवाएं

2012 18 बोरी सैंपल की दवाएं

2013 16 बोरी सैंपल की दवाएं

2014 नौ बोरी सैंपल की दवाएं

2014 दो बोरी सैंपल की दवाएं 

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