आगरा, जागरण संवाददाता। अग्निवीर बनाने और रेलवे के समूह ग में भर्ती कराने का झांसा देकर बेरोजगारों से ठगी करने वाले गिरोह के नौ लोगों को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने गिरफ्तार किया है। गिरोह तीन लाख रुपये में अग्निवीर और छह लाख रुपये में रेलवे में भर्ती कराने के नाम पर लोगों से ठगी करता था। एसटीएफ का दावा है कि गिरोह दर्जनों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। सरकारी विभागों में भर्ती निकलते ही गिरोह के सदस्य गांवों में जाकर बेरोजगारों काे जाल में फंसाते थे।

बेरोजगारों को फंसाता था गैंग

पुलिस उपाधीक्षक एसटीएफ उदय प्रताप सिंह के अनुसार आगरा ईकाई को गिरोह के बारे में पीड़ितों से जानकारी मिली थी। जो बेरोजगारों को अपने चंगुल में फंसा उनसे रकम वसूलता था। एसटीएफ ने ताजगंज के तोरा चौकी क्षेत्र से रविवार को घेराबंदी कर गिरोह को पकड़ लिया। मामले में आरोपितों के खिलाफ एसटीएफ की ओर से धोखाधड़ी एवं आइटी एक्ट की धारा के तहत के अभियोग पंजीकृत कराया गया है।

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लैपटाप में थे कई साफ्टवेयर जिनसे तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज

आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि जितेंद्र के लैपटाप में कई साफ्टवेयर हैं, जिसकी मदद से वह कूट रचित दस्तावेज तैयार करते थे।इन दस्तावेजों की मदद से ही गांवों में जाकर भर्ती होने की तैयारी करते लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें बताते कि ऊपर बात हो गई है, काम हो जाएगा। इसके अलावा जो युवक प्रतियोगी परीक्षा दे चुके हैं, उन्हें भी परिणाम उनके पक्ष में कराने की कहकर अपने जाल में फंसाते थे। बताते कि कई युवकों की इसी तरह से भर्ती करा चुके हैं।

एसटीएफ ने गिरफ्तार किए ये आरोपित

जितेंद्र निवासी मुबारकपुर इरादत नगर, युसूफ निवासी किदवई नगर सराय ख्वाजा शाहगंज, प्रभात शर्मा निवासी ए-ब्लाक ताजनगरी फेस-दो ताजगंज, संतोष निवासी पानी की टंकी पीछे गांव मलपुरा, धर्म सिंह निवासी गांव नारौल कागारौल, अनिल निनवासी नगला धनी सादाबाद हाथरस, सुल्तान निवासी रोहता सदर, सोनू निवासी जोनई सैंया एवं पवन चौधरी निवासी खाजपुर मथुरा।

आरोपितों से हुई ये बरामदगी

तीन लाख रुपये, 16 रेलवे समूह ग ई प्रवेश पत्र, एक कार, एक लैपटाप, 11 मोबाइल, छह दोपहिया वाहन, सात पैन कार्ड, 10 एटीएम कार्ड एवं चार आधार कार्ड

शिकार फंसाने पर देते थे 25 हजार रुपये

आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने गांवाें में अपने प्रतिनिधि बना रखे हैं। जिन्हें एक बेरोजगार अपने पास भेजने पर 25 हजार रुपये कमीशन देते थे। गिरोह से जुड़े लोग सुबह गांवों की ओर निकल जाते थे। वह भर्ती की तैयारी करते दौड़ लगाने वालों से संपर्क कर उन्हें जाल में फंसाते थे। 

Edited By: Abhishek Saxena

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