आगरा, प्रभजोत कौर। भारत और चीन के बीच के तनाव का असर हिंदी पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर नहीं पढ़ा है। भारत ने पूरी गर्मजोशी से चीनी विद्यार्थियों को हिंदी सीखने के लिए केंद्रीय हिंदी संस्थान में प्रवेश दिया है। संस्थान में विदेशी विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 100 सीटों के लिए 22 देशों के 83 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। इस साल तीन नए देशों से भी विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। विगत मंगलवार को दिल्ली में हुई प्रवेश समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि पाठ्यक्रम को 30 प्रतिशत कम करते हुए दिसंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं ही संचालित की जाएंगी।

विचाराधीन था चीन का मसला

भारत-चीन में बढ़ते तनाव के बाद चीनी विद्यार्थियों को प्रवेश देने के मामले पर शिक्षा और विदेश मंत्रालय विचार कर रहा था। मंगलवार को दिल्ली में हुई बैठक में दोनों मंत्रालयों से चीनी विद्यार्थियों को प्रवेश देने के मामले पर हरी झंडी मिल गई। चीन से छह विद्यार्थियों ने आवेदन किया था।

दिसंबर तक लगेंगी ऑनलाइन कक्षाएं

बैठक में कोरोना के कारण इस बार संस्थान ने ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का फैसला लिया है। यह कक्षाएं अक्तूबर से दिसंबर तक लगेंगी। वैश्विक स्तर पर सि्थतियां अनुकूल हुईं तो जनवरी से आगरा सि्थत मुख्यालय में ऑफलाइन कक्षाएं लगाई जाएंगी। विद्यार्थियों को प्रवेश सूचना के साथ ही ओरिएंटेशन कार्यक्रम की रूपरेखा भी भेजी जाएगी।प्रवेश समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि अगर अन्य किसी देश से आवेदन प्राप्त होता है तो निदेशक का निर्णय मान्य होगा।

इन देशों के विद्यार्थियों का हुआ चयन

बुल्गारिया से दो, चाइना से छह, कोस्टा रीका से चार, इजिप्ट से दो, फिजी से एक, गुयाना से तीन, हंगरी से एक, आयरलैंड से एक, जापान से दो, कजाकिस्तान से एक, मोंगोलिया से चार, मोरक्को से एक, म्यांमार से चार, पेरू से एक, पौलेंड से एक, रोमानिया से दो, रशिया से 11, साउथ कोरिया से एक, श्रीलंका से 10, तजाकिस्तान से 11, थाईलैंड से 13 व उजबेकिस्तान से एक।

तीन नए देश भी हुई सूची में शामिल

संस्थान में हर साल जिन देशों के दूतावासों के माध्यम से आवेदन आते थे, उनके अलावा इस साल तीन नए देशों से भी हिंदी सीखने के लिए विद्यार्थियों के आवेदन आए हैं।

यह देश पेरू, कोस्टा रीका और आयरलैंड हैं।वर्जनकोरोना के कारण इस साल दिसंबर तक आनलाइन कक्षाएं ही लगेंगी। संस्थान पूरी तरह से तैयार है।

- डा.चंद्रकांत त्रिपाठी, कुलसचिव

 

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