आगरा, जागरण संवाददाता। बेसहारा पशुओं को लेकर शासन गंभीर है, लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं। हर चौराहे, गली से लेकर हाईवे तक जगह-जगह बेसहारा नजर आते हैैं लेकिन इन्हें कांजी हाउस और गोशाला तक पहुंचाने की खानापूरी करके जिम्मेदार पल्ला झाड़ रहे हैैं। 

बेसहारा पशुओं को गोशाला में पहुंचाने का नगर निगम और पशुपालन विभाग कागजों में दावा करते हैं। इसी के अनुरूप गोशाला, कांजी हाउस के लिए फंड रिलीज हो रहा है। पुरानी गोशाला का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इन दावों पर विश्वास किया जाए तो बेसहारा पशुओं की समस्या नहीं है। सड़कों पर इसके उलट स्थिति है। शहर के चौराहों और प्रमुख बाजारों में बेसहारा राहगीरों को चोटिल कर रहे हैं। रोज दर्जनों लोग इनका शिकार बन रहे हैं।

खंदारी बाइपास चौराहे से सेठ पदम चंद जैन इंस्टीट्यूट की सड़क पर गोवंश का कब्जा रहता है। इस सड़क पर कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की खासी भीड़ रहती है। दिन में कई बार उन्हें पशु चोटिल कर देते हैं। ट्रांसपोर्ट नगर जाने वाली सड़क पर बीच में बैठ बेसहारा पशु रास्ता जाम कर देते हैं। सिकंदरा चौराहा पार करते ही मथुरा की ओर हाईवे पर गोवंश का कब्जा रहता है। सड़क चौड़ी है इसलिए छोटे वाहन और बसें बचकर निकल जाते हैं। कई बार हादसे की स्थिति बनती है। सिकंदरा सब्जी मंडी के सामने और अंदर तो गोवंश के झुंड रहते हैं। हाईवे पर निकल आए तो काफी देर तक रास्ता बाधित हो जाता है। घटिया चौराहे से सेंट जोंस की ओर जाने वाले रास्ते पर भी बेसहारा पशुओं का कब्जा है। ये राहगीरों को तो चोटिल करते ही हैं, ठेल और दुकान स्वामी भी आतंकित रहते हैं। रामनगर पुलिया और उसके आस-पास के क्षेत्र में बेसहारा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं।

कमिश्नर के आदेश भी हवा-हवाई

तीन बार मौखिक व दो बार मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में कमिश्नर अनिल कुमार ने एनएचएआइ व नगर निगम को बेसहारा पशुओं को गोशाला आश्रय स्थल में पहुंचाने के आदेश दिए। मंडलायुक्त के आदेश पर आज तक अमल नहीं हुआ है। कमिश्नर का कहना है कि इस बाबत संबंधित अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। 

Posted By: Prateek Gupta

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