आगरा(जागरण संवाददाता): 'दरीचों तक चले आए तुम्हारे दौर के खतरे, हम अपने घरों से बाहर झांकने का हौसला भी खो बैठे।' वसीम बरेलवी का ये शेर सुबह से शाम तक 'अर्थ' की धुन में उलझे मां-बाप पर सही बैठता है। उनका भविष्य बनाने की जिद्दोजहद में ऐसा मसरूफ हुए कि बच्चे महफूज भी हैं या नहीं, देखना भूल गए। अपनों की अनदेखी का मानसिक रूप से विकृत करीबियों ने फायदा उठाना शुरू कर दिया।

बाल यौन शोषण के शिकार मासूमों की जुबां पर डर की बेड़ियां लग गई। चाइल्ड लाइन के सदस्यों द्वारा स्कूल और बस्तियों में जागरूकता अभियान के दौरान यह बेड़ियां टूटना शुरू हो गई हैं। काउंसलर ने बच्चों से दोस्ती के बाद उनका विश्वास हासिल किया। यौन शोषण के शिकार मासूमों को उनके अभिभावकों की काउंसिलिंग करके इससे मुक्ति दिलाई। संस्था ने कुछ समय पहले बाल यौन शोषण के खिलाफ बालिकाओं के एक स्कूल में जागरूकता शिविर आयोजित किया था। इस दौरान करीब एक दर्जन छात्राओं ने काउंसलर के सामने स्कूल कैंटीन के एक युवक की शिकायत की। जो किसी न किसी बहाने उनके प्राइवेट पार्ट को छूने की कोशिश करता था। मगर, बच्चियां इस डर से शिकायत नहीं करती थीं कि पहल कौन करे। स्कूल प्रबंधन कहीं उन्हें ही गलत न समझ ले। शिकायत करने वाली छात्राओं से आरोपित रंजिश भी मान सकता था। काउंसलर ने बच्चियों की मुश्किल को देखते हुए स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी। उसने कार्रवाई करते हुए युवक को तत्काल कैंटीन से निकाल दिया। इससे बच्चियों में चाइल्ड लाइन की काउंसलरों के प्रति विश्वास बढ़ गया। उनसे दोस्ती करके लगातार संपर्क में रहने लगीं।

काउंसलर को 12 वर्षीय एक छात्रा ने परिवार के करीबी द्वारा यौन शोषण करने की जानकारी दी। उसने बताया कि माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं। अंकल उनके सामने तो अच्छा व्यवहार करते हैं। मगर, माता-पिता नहीं होते और वह अकेले में आते हैं तो उससे गंदी बातें और हरकतें करते हैं। कई बार उसने मां को इशारे में अंकल की हरकत के बारे में बताया लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इस पर काउंसलर ने छात्रा की मां से बात करने का फैसला किया। उनके घर पहुंचकर अपने आने का मकसद बताया तो छात्रा की मां नाराज हो गई। बेटी को भी डांटने लगीं, उन्हें परिचित द्वारा बेटी के साथ घटिया हरकत करने का विश्वास नहीं हो रहा था।

काउंसलर ने कई दिन तक महिला के पास जाकर उससे बातचीत की। उसे इस बात के लिए राजी किया कि वह बेटी की बात पर विश्वास करते हुए, परिचित को एक बार परख ले। महिला ने ऐसा ही किया, परिचित के आने पर वह उनके लिए चाय बनाने के बहाने अंदर चली गई। कुछ ही मिनट बाद अचानक लौटी तो परिचित को रंगे हाथ अश्लील हरकतें करते पकड़ लिया। इसके बाद मां ने माना कि वह गलत थीं। बेटी के इशारे को वह समझ नहीं पाई। मामला पुलिस में जाने पर समाज में बदनामी का डर था। इसलिए परिचित को दोबारा अपने घर में कदम न रखने की चेतावनी देकर हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। इस साल बाल यौन शोषण के 60 मामले:

ताजनगरी में बाल यौन शोषण के मामलों में वृद्धि हुई है। चाइल्ड लाइन के सदस्य रितु वर्मा और नरेंद्र परिहार के मुताबिक जून 2018 तक बाल यौन शोषण के 60 मामले काउंसलर के पास आए। जबकि पिछले साल कुल संख्या 150 थी। अधिकांश में आरोपित परिवार का करीबी या रिश्तेदार था। इन बच्चों और अभिभावकों के घर जाकर काउंसिलिंग की गई।

महिलाएं भी करती हैं बाल यौन शोषण:

बाल यौन शोषण में 95 फीसद पीड़ित बच्चियां होती हैं। जबकि चार से पांच फीसद आरोपित महिलाएं भी होती हैं। काउंसलर के सामने एक ऐसा ही मामला सामने आया था। इसमें कोचिंग में पढ़ाने वाली शिक्षिका 13 वर्षीय छात्र की ओर आकर्षित हो गई। उसे घर पर बुलाकर गंदी बातें और हरकतें करने लगी। इससे छात्र के व्यवहार में अचानक बदलाव आ गया। वह इंटरनेट पर अश्लील वेबसाइट पर ज्यादा समय बिताने लगा। एक दिन मां को शक होने पर उसने चाइल्ड लाइन की मदद ली। काउंसलर ने छात्र की कई सप्ताहकाउंसिलिंग की। विश्वास करने के बाद छात्र ने शिक्षिका की हरकतों के बारे में बताया। काउंसलर ने शिक्षिका से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं, इसलिए वह छात्र की ओर आकर्षित हो गई थी। उन्होंने माना कि गलती हुई है, परिजनों ने मामले को वहीं खत्म कर दिया।

एचआइवी पॉजीटिव निकला आरोपित:

बाल यौन शोषण की शिकार एक बच्ची के अभिभावकों के होश यह जानकर उड़ गए कि बच्ची एचआइवी पॉजीटिव हो सकती है। दस वर्षीय बालिका को कुछ महीने से संक्रमण हो गया था। काफी इलाज के बाद जब लाभ नहीं हुआ तो वह विशेषज्ञ डॉक्टर के पास लेकर गए। बच्ची के लक्षणों और रिपोर्ट को देखकर विशेषज्ञ ने उसके एचआइवी से संक्रमित होने की आशंका जताई। परिजनों ने चाइल्ड लाइन की मदद से बच्ची की काउंसिलिंग की। उसने परिवार के एक करीबी द्वारा यौन शोषण की जानकारी दी। आरोपित से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह एचआइवी पीड़ित है। इसने परिवार के होश उड़ा दिए। बच्ची के सारे टेस्ट कराए गए, रिपोर्ट सामान्य आने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

इन लक्षणों से चिन्हित करते हैं पीड़ित बच्चे:

चाइल्ड लाइन के सदस्य स्कूलों और बस्तियों में जागरूकता अभियान के तहत शिविर लगाते हैं। वहां पर विभिन्न तरह के खेल आयोजित करते हैं। इससे कि बच्चों के साथ घुलमिल सकें, उनसे दोस्ती करके विश्वास जीत सकें। कुछ लक्षणों के आधार पर वह बाल यौन शोषण के शिकार बच्चों को चिन्हित करते हैं।

प्रमुख लक्षण निम्न हैं:

-पीड़ित बच्चा शांत और सहमा सा रहता है। अन्य बच्चों के साथ आसानी से घुलता-मिलता नहीं है।

-काउंसलर या अन्य पास जाते हैं तो वह उनसे दूर जाने की कोशिश करता है।

-स्कूल में भी गुमसुम रहता है, पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता। व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाता है।

-अपने प्राइवेट पार्ट में लगातार दर्द होने की शिकायत करता है।

Posted By: Jagran

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