आगरा, जागरण संवाददाता। देश की सबसे पुरानी जेल 'आगरा जिला कारागार' में जल्द ही रेडियो प्रसारण शुरू होगा। इसमें स्टूडियो स्थापना की तैयारी चल रही है। इस रेडियो का संचालन पूरी तरह से कारागार में निरुद्ध महिला व पुरुष बंदी ही करेंगे। प्रदेश की यह तीसरी और मंडल की दूसरी जेल होगी, जहां इस तरह का रेडियो प्रसारण शुरू होने जा रहा है।

'तिनका तिनका' अभियान के तहत भारत में जेल सुधार कार्यक्रम चला रही वर्तिका नन्दा ने आगरा जिला जेल के लिए जेल रेडियो की संकल्पना की है। उन्होंने कई दौर में जिला कारागार का भ्रमण कर अधिकारियों व निरुद्ध बंदियों से बातचीत कर पूरा खाका तैयार किया। वे ही शुरुआती दौर में इन बंदियों को रेडियो कार्यक्रम के निर्माण और प्रस्तुतीकरण की ट्रेनिंग देंगी। इस जेल रेडियो का नाम अभी साझा नहीं किया गया है।

डॉ. नंदा के मुताबिक जिला जेल के मुख्य द्वार से लगे एक कमरे में स्टूडियो बनाने की तैयारी चल रही है। वर्ष 1741 में मुगलों के जमाने में हज यात्रियों की आरामगाह के लिए इस भवन का निर्माण किया गया था। इसे बाद में जिला जेल बना दिया गया।

जिला जेल में कार्यक्रमों का संचालन पूरी तरह यहां निरुद्ध बंदी करेंगे। प्रसारण हर रोज शाम को तीन से चार बजे के बीच होगा। इसके लिए रेडियो टीम का गठन कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि आगरा जिला जेल के अधीक्षक शशिकान्त मिश्र लंबे समय से इस जेल में सुधारात्मक काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में इस जेल में जो नए प्रयोग किए गए हैैं उनमें जेल का रेडियो एक अलग तरह का प्रयोग साबित होगा। तैयार हो रहे स्टूडियो में नई पेंटिंग बनाई जा रही है, ताकि यह व्यवसायिक स्टूडियो की तरह ही आकर्षक लगे। फिलहाल, बंदी इस रेडियो के लिए अपनी स्क्रिप्ट के काम में जुट गए हैं।

वर्तिका नन्दा देश की स्थापित जेल सुधारक और जेलों पर देश के अपनी तरह के पहले अभियान 'तिनका तिनका' की संस्थापक हैं। उन्हें खास प्रयोगों के चलते महिलाओं के लिए देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'स्त्री शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है। फिलहाल वे दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज के पत्रकारिता विभाग में अध्यापन कर रही हैं।

आगरा जिला जेल

कुल निरुद्ध बंदी : 2594

विचाराधीन बंदी : 2061

सिद्धदोष बंदी : 533

मैनपुरी जिला जेल रेडियो को उद्घाटन का इंतजार

आगरा में प्रस्तावित जेल रेडियो की तरह ही मैनपुरी जिला जेल में भी रेडियो चल रहा है। हालांकि, आचार संहिता के कारण अभी इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो सका है। यहां 1082 महिला व पुरुष बंदी निरुद्ध हैं। जेल सुधार कार्यक्रम के तहत बीते वर्ष जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने इसका प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए जेल में स्टूडियो बनाया गया है। हर बैरक के बाहर हाई डेफिनेशन स्पीकर लगाए गए हैं। इन स्पीकर्स को स्टूडियो से कनेक्ट किया गया है। पांच महिला बंदियों और दस पुरुष बंदियों का चयन कर उन्हें रेडियो जॉकी और कार्यक्रम संचालन का तरीका समझाया गया है। ये वो बंदी हैं, जिनकी आवाज बेहतर है और जो गीतों को गुनगुनाने में रुचि रखते हैं। इसमें बंदियों से हर रोज फरमाइश पूछी जाती है और उन्हीं गीतों का प्रसारण किया जाता है। इसके अलावा जेल में आयोजित होने वाली गतिविधियों केसंबंध में इस पर जानकारी दी जा रही है। फिलहाल रेडियो पर एक घंटे का प्रसारण किया जा रहा है।

पब्लिक एड्रेस सिस्टम लागू करने के दिए गए हैं निर्देश

जेलों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में मैनपुरी और बिजनौर में जेल रेडियो की शुरुआत हो चुकी है। अब आगरा में इस तरह की पहल की जा रही है।

चंद्रप्रकाश, एडीजी जेल 

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Posted By: Tanu Gupta

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