आगरा, जागरण संवाददाता। बिजली विभाग सीजन की तैयारी के बड़े-बड़े दावे करता है। करोड़ों रुपये खर्च करने का खाका खीचा जाता है, लेकिन बिजली नेटवर्क फिर भी पुराने ढर्रे पर ही है। यही कारण है कि बारिश का जोर होते ही विभाग के पोल खुल गई।

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के कर्मचारी गर्मी, सर्दी के मौसम से पहले ही बिजली नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए रूप रेखा तैयार करते हैं। यह इस बार भी किया गया। करोड़ो रुपये की लागत से फीडर की क्षमता बढ़ोतरी, लाइनों का निर्माण, ट्रांसफारमरों की शिफ्टिंग, गिरासू खंभों को बदलना आदि का शामिल थे। जिससे उपभोक्ताओं को बिजली की अधिक जरूरत पड़ने पर कोई दिक्कत नहीं हो, लेकिन बिल्कुल उलटा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कौटती का बुरा हाल है। जर्जर लाइन और खंभे हादसे को न्यौता दे रहे हैं। बिना शेड्यूल के बिजली आपूर्ति है। ग्रामीण उपभोक्ता परेशानी झेल रहे हैं।

हादसे का इंतजार

सिकंदरा के विद्युत वितरण खण्ड प्रथम से पोषित होने वाले शिवाकुंज में बिजली का खंभा गिरासू हालत में खड़ा है। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी खंभा को हटाने की शिकायत की गई, लेकिन विभाग ने खंभा बिना हटाए ही शिकायत का निस्तारण दर्शा दिया। खंभा गिरने से कभी भी हादसा हो सकता है।

बारिश में उठती है चिंगारी

बोदला बिचपुरी रोड पर श्याम कॉलोनी नई बनी है। इसमें लगभग 60 परिवार रहते हैं। इनकी आपूर्ति बिचपुरी के मुख्य मार्ग के ट्रांसफारमर से होती है। कॉलोनी में 11 केवी की लाइन लगी है, पर ट्रांसफारमर नहीं लगा। ऐसे में झूलते तारों से बारिश में चिंगारी निकलती है।

तेज हवा में गिर सकता है खंभा

बिजली घर चौराहे के पास टोरंट के कार्यालय के सामने बिजली का खंभा खड़ा है। वह काफी छुका हुआ है। तेज हवा में कभी भी हादसे का सबब बन सकता है।

डीवीवीएनएल की लाइन में तीसरे दिन फॉल्ट होता रहता है। इसकी शिकायत करते हैं। संविदाकर्मी बिना रुपये ले फॉल्ट सही नहीं करते।

रोहित

डीवीवीएनएल में आपूर्ति में कोई परिवर्तन नहीं हैं। सुविधा के नाम पर जीरो है। बिल वसूलने में कर्मचारी तुरंत कार्रवाई कर देते हैं।

अनुराग

बारिश से पहले लाइनों को सुधारने का कार्य किया गया था। कुछ का काम प्रस्तावित है। बहुत जल्द बदल दी जाएंगी।

हरीश बंसल, अधीक्षण अभियंता 

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