आगरा, जागरण संवाददाता। यमुना नदी में 15 फीट नीचे बालू में धंसी कार को निकालने के लिए पांच पेशेवर गोतोखोरों को 50 डुबकी लगानी पड़ीं। पानी का तेज बहाव उन्हें अधिक समय तक अंदर नहीं रुकने दे रहा था। चौबीस घंटे चले रेस्क्यू के बाद 51वें प्रयास में गोताखोरों को कार में कांटा फंसाने में सफलता मिली।

फंस गया था जाल

न्यू अागरा के गांव सिकंदरपुर निवासी सियाराम उनके दोनों पुत्र सनोज, मनोज औेर भतीजे अभिषेक पेशेवर गोताखोर हैं। पंडित भी उनके साथ रहते हैं। वह भी गोताखोर हैं। मनोज और सनोज ने बताया कि वह सोमवार की दोपहर में नदी में जाल डालने आए थे। जाल गलत जगह पड़ने पर उसे निकालने लगे तो वह फंस गया। पानी के अंदर जाकर देखा। जाल में कार फंसी थी। सूचना पुलिस को दी। शाम से रेस्कयू शुरू किया।

कार में फंसाया गया कांटा

मंगलवार की सुबह नौ बजे से वह रेस्क्यू में जुट गए। गोताखोर अभिषेक और पंडित ने बताया कि पानी का बहाव तेज था। वह 15 फीट नीचे पानी में उन्हें 30 से 35 सेकेंड तक ही ठहर पा रहे थे। जिस पर पांचों लोगों ने खुद को दस-दस डुबकी लगाना तय किया। जिससे कि सभी को आराम मिल सके। कार में कांटा फंसाने के लिए दोपहर तक 50 डुबकी लगा चुके थे। जिसके बाद उन्हें सफलता मिली।

दोपहर में यमुना किनारे आए थे स्वजन

प्रकाश पेरवानी की तलाश में जुटे स्वजन ने पुलिस काे बताया कि वह सोमवार को दिन में यमुना किनारे पर भी आए थे। नदी के किनारे रहने वालों से जानकारी की। मगर, यहां पर किसी तरह के हादसा होने से अनभिज्ञता जताई। जिस पर वह लौट गए थे।

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यमुना किनारे लोहे के गाडर लगाने की उठी मांग

इलाके के लोगों ने यमुना नदी के किनारे सुरक्षा के चलते लोहे या पत्थर के गाडर लगाने की मांग की। उनका कहना था कि दोपहिया वाहन सवार यहां पर कई बार हादसे का शिकार होने से बचे हैं। कोहरे के दौरान यहां पर हादसे की आशंका बढ़ जाती है।

कार के अंदर मौजूद था सामान

कार की चालक सीट और पीछे का एक शीशा तोड गया। रस्सों में कांटा बांधकर उसे कार में फंसाया। ट्रैक्टर की मदद से दोपहर करीब ढाई बजे कार को बार निकाला गया। वहां मौजूद स्वजन और पुलिस ने कार को देखा तो वह खाली थी। गाड़ी के चारों गेट बंद थे। चालक सीट के बराबर वाला शीशा टूटा था। उसमें पानी भरा हुआ था। अंदर बोतलें व अन्य सामान रखा था। प्रभारी निरीक्षक न्यू आगरा विजय विक्रम सिंह ने बताया कि यमुना में जाल डालकर तलाश की जा रही है। यमुना से लगे थानों के अलावा मथुरा और फिरोजाबाद को भी सतर्क किया गया है।

पुलिस जांच में सामने आए बिंदु

  • -कार के चारों गेट लाक थे।
  • -कार में चाबी चालू हालत में लगी थी।
  • -कार की हैंड ब्रेक लगी थी।
  • -उनकी टोपी कार की पिछली सीट पर पड़ी हुई थी।
  • -मोड़ से आगे यमुना नदी जाने वाले रास्ते पर टायरों के घिसटने के निशान थे। जिससे अनुमान है कि कार चला रहे व्यक्ति ने हैंड ब्रेक लगाकर उसे रोकने का प्रयास किया गया।

दिल्ली में चल रहा था आंखों का इलाज

प्रभारी निरीक्षक विजय विक्रम सिंह ने बताया कि छानबीन और स्वजन से बातचीत में सामने आया कि प्रकाश पेरवानी काे आंखों से कम दिखाई देता था। वह दिल्ली में अपना उपचार करा रहे थे। जिस जगह कार डूबी, वहां 21 जनवरी की रात को घना कोहरा था।अनुमान है कि कोहरे के चलते उन्हें आगे का रास्ता न दिखा हो।

तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं

परिवार के करीबी लोगों ने पुलिस को बताया कि प्रकाश पेरवानी तीन भाइयाें में सबसे छोटे हैं। बड़े भाई जगदीश दिल्ली में सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। मंझले भाई सुरेश विदेश में रहते हैं। प्रकाश की पत्नी उनके साथ नहीं रहती हैं। पुष्पांजलि सीजंस में वह मां के साथ रहते हैं। 

Edited By: Abhishek Saxena

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