आगरा, जागरण संवाददाता। नील फ्लोरेंस हो या फिर नालंदा टावर और आनंदा प्रोजेक्ट। इन प्रोजेक्ट में सात करोड़ रुपये बिल्डरों ने बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) का आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में जमा कराया। इन तीनों ही प्रोजेक्ट के बाहर न तो रोड बनाई गई और न ही नाली और नाले का निर्माण किया गया। क्षेत्रीय निवासियों ने एडीए और नगर निगम में 50 से अधिक शिकायतें कीं। उम्मीद थी कि विकास कार्यों के लिए तरसते लोगों की शिकायतों का निस्तारण किया जाएगा, लेकिन एडीए अफसरों ने शिकायतों को अनसुना कर दिया। दस साल के भीतर न तो रोड बनाई गई और न ही अन्य कोई विकास कार्य कराया गया।

सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट के आसपास डेढ़ दर्जन के करीब प्रोजेक्ट हैं। इनमें प्रमुख रूप से कास्तुम कावेरी का डेढ़ करोड़, आनंदा टावर प्रथम और द्वितीय का तीन करोड़ रुपये, नील फ्लोरेंस का तीन करोड़ रुपये, गणपति का एक करोड़ रुपये, नालंदा टावर का 50 लाख रुपये, गणपति रेजीडेंसी का 80 लाख रुपये, गणपति क्लासिक का एक करोड़ रुपये ईडीसी शामिल है। अगर क्षेत्र में विकास कार्य की बात की जाए तो वर्ष 2009 में एडीए ने एक करोड़ रुपये से भावना एस्टेट की मुख्य रोड का निर्माण किया था। इसके बाद अफसरों और बिल्डरों की दो दर्जन बैठकें हुईं। हर बैठक में बिल्डरों ने विकास कार्य कराने पर जोर दिया, लेकिन एडीए अफसरों ने न तो कोई प्लानिंग तैयार की और न ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया।

क्या कहते हैं लोग

एडीए अफसरों की लापरवाही के चलते क्षेत्र का विकास नहीं हो सका है। रोड, नाली और नाले का निर्माण आज तक नहीं हुआ है।

-गोपाल बघेल, भावना एस्टेट

एडीए अफसरों ने ईडीसी भरपूर ली लेकिन जब विकास कार्य कराने की बारी आई तो पीछे हट गए। विकास कार्य न होने से जनता परेशान है।

-विमल यादव, नील फ्लोरेंस कालोनी

भावना एस्टेट और उसके आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए एडीए अफसरों को 10 से अधिक पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन ठोस परिणाम नहीं मिले।

-प्रताप सिंह गुर्जर, पार्षद वार्ड 96

जिस तरीके से क्षेत्र में ईडीसी एडीए जमा हुआ है, उस तरीके से विकास कार्य होने चाहिए। इससे लोगों को होने वाली दिक्कतों से बचाया जा सकेगा।

-संतोष कटारा, पूर्व निर्वाचित अध्यक्ष क्रेडाई यूपी शाखा

क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगी है, जबकि कालोनी विकसित करने पर एडीए करोड़ों रुपये का ईडीसी वसूलता है।

-तेजपाल, आनंदा कालोनी

Edited By: Nirlosh Kumar