आगरा में तालाबों पर अतिक्रमण पर एनजीटी सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब; जांच के लिए संयुक्त समिति गठित
एनजीटी ने आगरा में तालाबों और पोखरों पर अतिक्रमण के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जांच के ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
एनजीटी ने आगरा के तालाबों पर अतिक्रमण मामले में संज्ञान लिया।
राज्य सरकार से जवाब मांगा और संयुक्त जांच समिति गठित की।
यूपीपीसीबी को तालाबों के पानी के नमूने लेने का निर्देश दिया।
जागरण संवाददाता, आगरा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जिले में तालाबों, पोखरों और झीलों पर हुए अतिक्रमण से संबंधित याचिका का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की बेंच ने जांच के लिए संयुक्त समिति गठित करते हुए 10 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) तालाबों और पोखरों के पानी का सैंपल लेकर उनकी रिपोर्ट अगली सुनवाई से पूर्व दाखिल करेगा। मामले में अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।आगरा के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने एनजीटी में 12 सितंबर को जिले के तालाबों, पोखरों और झीलों के संरक्षण के लिए याचिका दायर की थी।
17 सितंबर को सुनवाई में स्वयं पैरवी करते हुए वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कहा कि जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित तालाबों, पोखरों पर अतिक्रमण हो चुका है। घरों का गंदा पानी और कूड़ा तालाबों में डाला जा रहा है। उन्होंने साक्ष्य के रूप में तालाबों की जीपीएस लोकेशन और सेटेलाइट इमेज प्रस्तुत कीं।
इनमें तालाबों पर हुआ अतिक्रमण और कूड़ा दिख रहा है। एनजीटी ने जल निकायों की सही स्थिति का पता लगाने के लिए संयुक्त समिति गठित की है। समिति में यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव के प्रतिनिधि, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी, ताज ट्रेपेजियम जोन अथारिटी के चेयरमैन के प्रतिनिधि और डीएम को शामिल किया गया है।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि शहर से जिले तक तालाब अतिक्रमण के शिकार हैं। कई तालाबों पर कब्जा कर निर्माण कर लिए गए हैं। तालाबों में गंदा पानी जाने से भूगर्भ जल भी प्रभावित हो रहा है। तालाबों से अतिक्रमण हटाकर उनका संरक्षण व जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए।
