आगरा, जागरण संवाददाता। बंदरों की दहशत से बंद दरवाजों के अंदर रेखा और बच्चों की चीखें नहीं पहुंच सकी थीं। इसका फायदा उठा संतोष और उसके दोनों दोस्तों ने 21 जुलाई को चार लोगों की गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद वह बारी-बारी से गली से आराम से निकल भागे थे।

रेखा राठौर के घर से दस कदम दूरी पर अंशु, फरहान, राधेलाल वर्मा आदि के मकान हैं। इसके अलावा पांच फीट की गली में तीन दर्जन अन्य मकान भी हैं। बंदरों की दहशत के चलते इन घरों में रहने वालों ने अपने घरोंं को पिंजरे में तब्दील कर दिया है। छत पर जाल लगा रखा है, मुख्य दरवाजे को भी पूरी तरह से लोहे के जाल से बंद कराया हुआ है। अंशु, फरहान और राधेलाल वर्मा का कहना था कि बंदरों के चलते वह दरवाजों को हमेशा बंद रखते हैं। दरवाजा खुला देखते ही बंदर घर के अंदर हेाते हैं। वह खाने-पीने का सामान, कपड़े, साबुन समेत जो भी सामान सामने दिखाई देता है, उठा ले जाते हैं।

बंदर गली में बच्चों को भी कई बार काट चुके हैं। इसके चलते लोग बच्चों को घर से अकेले नहीं निकलने देते हैं।कूचा साधूराम में बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा है। महिलाएं और बच्चे हाथ में कोई सामान लेकर गली में नहीं घुस सकते। अंदर आते ही बंदर उन्हें घेरकर सामान छीन लेते हैं। महिलाओं को घर से गली में जाते समय हाथ में डंडा लेकर निकलना पड़ता है। गली में रहने वाले लोगों का कहना था कि हत्यारों ने बंदरों की दहशत का फायदा उठाया।

हत्यारों काे पता था कि गली में रहने वाले लोग अपने घरों के दरवाजे हमेशा बंद रखते हैं। गली में दिन भर सन्नटा पसरा रहता है। इसलिए हत्यारे तीन घंटे तक रेखा के घर में रहे। गली के लोगों काे इसकी भनक तक नहीं लग सकी। वह रेखा और तीनों बच्चों की हत्या करके आराम से भाग निकले थे। वह किसी की नजर में नहीं आ सके।

तीन साल पहले हो चुकी है चांदी कारीगर की मौत

कूचा साधूराम में कुएं वाली गली में तीन साल पहले बंदरों ने छत पर लगे पत्थर को दरवाजे पर बैठे चांदी कारीगर हरि शंकर गोयल पर गिरा दिया था।जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसके अलावा तीन महीने पहले तिलक बाजार में छत पर गए युवक को बंदरों ने घुड़की देकर गिरा दिया था। उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

Edited By: Prateek Gupta