यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आगरा में 15 नवंबर है शीतगृह संचालन की अंतिम तिथि, 20 फीसद भंडारित है आलू
पंजाब की फसल आने से घटनी शुरू हो गई स्थानीय आलू की मांग। जिले में 71 हजार हेक्टेयर में आलू ...और पढ़ें

आगरा, जागरण संवाददाता। आलू बीज की निकासी भी हो चुकी है, लेकिन 20 फीसद भंडारित आलू अभी संकट बना हुआ है। शीतगृह संचालन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 15 नवंबर कर दी गई है, लेकिन निकासी धीमी गति से हो रही है। पंजाब की फसल की दिल्ली और स्थानीय मंडी में आवक शुरू हो गई है, जिससे अब मांग घटनी शुरू हो जाएगी।
जिले में 71 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल हुई थी। फरवरी में खोदाई के बाद अधिकतर किसान फसल को भंडारित कर देते हैं, तो कुछ खेत से ही आलू बेच देते हैं। इस बार सड़क ही नहीं ट्रैक के माध्यम से भी आलू को दूसरे राज्यों तक पहुंचाया गया, लेकिन फिर भी आलू शीतगृह में फंसा हुआ है। दिल्ली सहित दक्षिण भारत की मंडियों में आगरा के आलू की मांग सर्वाधिक होती है। फिलहाल 150 से 200 ट्रक आलू रोज बाहर की मंडियों में जा रहा है। दाम बढ़ने की उम्मीद से व्यापारियों ने भी किसानों से खरीद आलू भंडारित कर रखा है, तो कुछ किसानाें का आलू भी है। सप्ताहभर में निकासी नहीं हुई तो किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
पंजाब और स्थानीय आलू के अलग-अलग हैं भाव
स्थानीय आलू का थोक भाव 10 रुपये प्रति किलोग्राम बना हुआ है। वहीं पंजाब के आलू के दाम थो में ही 20 से 22 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं फुटकर बाजार में तो विक्रेताओं की मनमानी पर दाम निर्भर हैं। स्थानीय आलू को 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम और पंजाब के आलू को 40 रुपये तक फुटकर बाजार में बेचा जा रहा है।
निकासी नियमित होती रहनी चाहिए। अब तो दाम भी बेहतर मिल रहे हैं। दूसरे राज्यों का आलू आने से मांग प्रभावित हो रही है।
कौशल कुमार, उप निदेशक उद्यान
