आगरा, प्रभजोत कौर। महिलाओं को अन्नपूर्णा और गृहलक्ष्मी जैसे अनेक नामों से पुकारा जाता है। हर भूमिका में खुद को साबित करने वाली महिलाएं इन दोनों नामों को आज के समय में घर बैठे-बैठे ही चरितार्थ कर रही हैं। शहर की कई महिलाएं अन्नपूर्णा के रूप में अपना खाने का बिजनेस कर रही हैं तो इसी बिजनेस से गृहलक्ष्मी के रूप में परिवार को आर्थिक संबल भी दे रही हैं। 

दो साल पहले संगति बंसल ने करी पत्ता नाम से इडली और डोसा बनाकर बेचने का काम शौक के रूप में शुरू किया। शुरुआत पांच पैकेट से की थी। धीरे-धीरे सिलसिला आगे बढ़ा और आज दिन में दो सौ किलो पेस्‍ट बाजार में बिकता है। संगति ने बताया कि वे सामान्य इडली-डोसा पेस्‍ट, रागी और मल्टी ग्रेन पेस्‍ट तैयार करती हैं। साउथ इंडियन कोकोनट चटनी, गन पाउडर, सांबर मसाला आदि की भी काफी डिमांड रहती है। जल्द ही मथुरा, एनसीआर में भी काम फैलाने वाली हैं।

कुछ ऐसी ही कहानी सोनिया मनकलता की भी है। सोनिया के हाथ में स्वाद है, इसीलिए सालों से उनकी सहेलियां और घरवाले कहते थे कि खाने का काम शुरू कर दो। लेकिन सोनिया का जवाब होता था कि हर समय रसोई में ही घुसी रहूं। फिर एक दिन इडली सांबर बनाया तो अपने ग्रुप में फोटो शेयर की। कुछ दोस्तों ने खाया तो इतना पसंद आया कि खाने के ऑर्डर मिलने लगे। तीन महीने में ही सोनिया कई पार्टियों और देवी जागरण आदि में खाना बनाकर भेज चुकी हैं।

नीरव निकुंज में रहने वाली भावना गौतम ने तो घर के खाने को ही अपना बिजनेस बनाया है। बाहर से आकर यहां नौकरी करने वाले उनकी टिफिन सर्विसेज सेवा का फायदा लेते हैं। इसी साल मई से शुरू किया गया काम आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप्स पर भी उपलब्ध है। भावना कहती है कि भारतीय खाना बहुत पौष्टिक है, इसे बनाने का तरीका सुधार लें तो बहुत फायदा मिलेगा। लोगों को मेरा बनाया सरसों का साग बहुत पसंद आता है।

स्पाइस हट नाम से काम कर रही गीता गोस्वामी की कहानी थोड़ी अलग है। मुंबई की रहने वाली गीता को यहां मुंबई का स्वाद नहीं मिला। मसाले नहीं मिले। इस परेशानी को दूर करने के लिए गीता ने मसाले बनाने शुरू किए। आज यह स्थिति है कि दूसरे शहरों से भी गीता के बनाए मसालों और अचारों के लोग मुरीद हैं। महाराष्ट्रियन फूड उनकी खासियत है। बिना कैमिकल और प्रिजरवेटिव के अचार बनाना उनकी खूबी है। 18 मसालों से मिलकर बना कांदा लहसुन मसाला हमेशा डिमांड में रहता है।

प्रियंका जैन को केक पसंद है। लेकिन अंडा नहीं खाती हैं। सोचा कि यही दिक्कत दूसरों को भी होती होगी। बस यहीं से सिलसिला शुरू हुआ। एक दिन कुकीज बनाकर घर के पास की दुकान पर बेचने के लिए रखी। वो इतनी पसंद आई कि लोगों ने ऑर्डर देने शुरू कर दिए। 2016 से यमी टमी के नाम से काम कर रही हैं। अब प्रियंका के बनाए एगलैस केक और कुकीज पार्टियों, रेस्टोरेंट्स और होटलों तक में जाते हैं। 

Posted By: Prateek Gupta

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस