आगरा, जागरण संवाददाता। बात जब स्वच्छता की आई तो हर बार इंदौर का नाम लिया गया। उसका माडल देखने के लिए आगरा नगर निगम टीमों ने दौड़ भी लगाई मगर, सीखने में शून्य रहे। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पूरी तरह नही चल सका। कूड़ा निस्तारित कर आय के नये रास्ते नहीं बना सके। नतीजा यह हुआ कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में पहले से भी आठ कदम नीचे फिसल गए।

सीख में शून्य रहने वाला नगर निगम खर्च में अव्वल बनने के लिए डटा रहा। रोजाना करीब दस लाख रुपये खर्च करने के बावजूद कूड़े का कलंक नहीं मिट सका। प्रमुख बाजार संजय प्लेस स्थित आयकर भवन या विकास भवन,रुई की मंडी हो या फिर कोई प्रमुख बाजार या कालोनी, उनमें बिखरा कचरा व रोड किनारे लगे कूड़े के पहाड़ ताजनगरी के माथे पर दाग बन गए हैं। कूड़े ने शहर का ‘कबाड़ा’ कर दिया, इसके बावजूद परिणाम घोषित होने के 48 घंटे बाद भी शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम किसी कार्ययोजना को मूर्त रूप देता हुआ नजर नही आ रहा है। नगर निगम के सौ वार्डों से हर दिन 800 टन कूड़ा निकलता है। इसमें 450 टन सूखा, 300 टन गीला और 50 टन सिल्ट शामिल है। इसके निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नही है हर घर से कचरा लेने की डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना ठप है। घरों का कचरा डस्टबिन और डलाबघरों के आसपास जमा हो रहा है। नालों और सड़कों के किनारे भी डम्प हो रहा है। हालात यह है कि घर- घर से कूड़ा लेने के लिए वाहन नहीं पहुंच रहे है। संकरी गलियों में हथ के ठेले नहीं पहुंच रहे है। 176 में से 100 से अधिक डलाबघरों से हर दिन कचरा नहीं उठ रहा है। डलाबघरों से ट्रांसफर स्टेशन तक कूड़ा नहीं जा रहा है। ट्रांसफर स्टेशन से काम्पेक्टर का उपयोग नहीं हो रहा हो रहा है। चमड़े की कतरन नालों में पहुंच कर उनको चोक कर रही है। 150 से अधिक स्थानों पर डस्टबिन, डलाबघरों में कचरा जलाकर निस्तारित किया जा रहा है।

मंगलवार को विभिन्न टीमों द्वारा सफाई व्यवस्था का औचक निरीक्षण होगा। अगर कही कमी है तो उसको दूर किया जाएगा। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

निखिल टीकाराम नगर आयुक्त 

Edited By: Tanu Gupta