आगरा, जागरण संवाददाता। भगवान की भास्कर की विशेष आराधना, उनके दक्षिणायन से उत्तरायण होने का पर्व। पवित्र स्नान और दान पुण्य का दिन मकर संक्रांति कल है। ज्योतिषाचार्य डॉ शाेनू मेहरोत्रा के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान उत्तरायण होते हैं। मान्यता है कि इस दिन से देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं। साथ ही, घरों में मांगलिक कार्य भी संपन्न होने आरंभ हो जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन मान्यता है कि भगवान सूर्य की अराधना होती है। मकर संक्रांति को अलग-अलग प्रांतों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में जहां इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। वहीं, असम में इस दिन बिहू और दक्षिण भारत में इस दिन पोंगल पर्व मनाया जाता है। गुजरात में संक्रांति के दिन विशेष तौर पर पतंगबाजी का आयोजन होता है। इस दिन बच्चे- बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ अपने घर की छतों पर पतंग उड़ाते हैं और मकर संक्रांति मनाते हैं।

जानें शुभ मुहूर्त

इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव सुबह 8 बजकर 14 मिनट धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ मकर संक्रांति की शुरुआत हो जाएगी। दिन भर में पुण्य काल की बात करें तो वो करीब शाम के 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। हालांकि, महापुण्य काल सुबह सवेरे ही रहेगा। माना जाता है कि पुण्य काल में स्नान-दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

क्या है पूजा विधि

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव को जल, लाल फूल, लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, अक्षत, सुपारी और दक्षिणा अर्पित की जाती है। पूजा के उपरांत लोग अपनी इच्छा से दान-दक्षिणा करते हैं। साथ ही, इस दिन खिचड़ी का दान भी विशेष महत्व रखता है।

कैसे मनाएं मकर संक्रांति

मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। गरीबों को यथाशक्ति दान दें। पवित्र नदियों में स्नान करें। खिचड़ी का दान देना विशेष फलदायी माना गया है। इसके अलावा गुड़- तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद बांटा जाता है।

ऐसी है मान्यता...

इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा और पावन नदियों में स्नान कर दान करते हैं। मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का वध कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के रूप में मनाया जाता है। 

5 ग्रहों का होगा गोचर

इस बार मकर संक्रांति पर मकर राशि में कई महत्वपूर्ण ग्रह एक साथ गोचर करेंगे। इस दिन सूर्य, शनि,

गुरु, बुध और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। जोकि एक शुभ योग का निर्माण करते हैं।

मकर संक्रांति का भोग

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने लड्डू और अन्य मीठे पकवान बनाने की परंपरा है। यह भी कहा जाता है कि इस समय मौसम में काफी सर्दी होती है, तो तिल और गुड़ से बने लड्डू खाने से स्वास्थ्य ठीक रहता है।

इस दिन को देवायन कहते हैं

मकर संक्रांति के दिन देवलोक में भी दिन का आरंभ होता है। इसलिए इसे देवायन भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवलोक के दरवाजे खुल जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य की अराधना होती है।

 

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