आगरा, जेएनएन। मथुरा के दक्षिण में श्री रंगेश्वर महादेव क्षेत्रपाल के रूप में मौजूद हैं। क्वालिटी तिराहा-होली गेट मार्ग स्थित गली में हैं। रंगेश्वर महादेव के लिए दूसरा रास्ता अंतापाड़ा से भी है। पुराने स्टैंड से पैदल भी रंगेश्वर महादेव पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर उनमें हैं जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित हैं। ब्रज आने वाले श्रद्धालु भी रंगेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं।

इतिहास

धार्मिक मान्यता है कि रंगेश्वर मंदिर द्वापरकालीन है। श्रीकृष्ण और बलराम में कंस को मारने के बाद झगड़ा होने लगा। भगवान श्रीकृष्ण का कहना था कि कंस को उन्होंने मारा है, जबकि बलराम का कहना था कि कंस काे उन्होंने मारा है। दोनों भाइयों में झगड़ा देख शिवजी प्रगट हुए। शिवजी ने कहा कि तुम दोनों भाइयों ने ही कंस को मारा है। कृष्ण तुम छलिया हो तुमने छल से मारा है, बलराम तुम बलिया हो, तुमने बल से मारा है। दोनों ने ही कंस का वध किया है। इतना कहकर जब शंकर भगवान चलने लगे तो दोनों भाइयों ने हाथ जोड़कर कहा कि प्रभु आपने जिस प्रकार हम दोनों भाइयों का न्याय कराया है, उसी प्रकार आपको रंगेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाएगा। तभी से महादेव की पूजा रंगेश्वर महादेव के रूप में की जाती है।

मंदिर की विशेषता

रंगेश्वर महादेव को दक्षिण का कोतवाल माना जाता है। रंगेश्वर महादेव पर 40 दिन दीपक जलाने से प्रार्थना पूरी होती है। घर में सुख-समृद्धि होती है और काया भी निरोगी रहती है। संतान प्राप्ति को भी श्रद्धालु रंगेश्वर महादेव से प्रार्थना करते हैं। जिसकी वजह से यहां पर दूर दराज क्षेत्र से श्रद्धालु पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं।

रंगेश्वर महादेव भक्ताें को कभी निराश नहीं करते हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्ताें की मनोकामना पूरी करते हैं। रंगेश्वर महादेव श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। सावन के सोमवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लग जाती हैं। सोमवार को सुबह पूजा और शाम को श्रृंगार के दर्शन होंगे।

शंकरनाथ पुजारी, महंत

रंगेश्वर महादेव में सच्ची आस्था है। महादेव अपने भक्ताें के कष्ट दूर करते हैं। जब भी परेशानी आती है, महादेव की शरण में आ जाते हैं। महादेव परिवार के दुख हर लेते हैं। रंगेश्वर मंदिर में भक्ति की अविरल धारा बहती है। भक्ताें का दिन भर तांता लगा रहता है। महादेव की पूजा-अर्चना का दौर दिन भर चलता रहता है।

शालू अग्रवाल, होली गेट

Edited By: Tanu Gupta