आगरा, जागरण संवाददाता। सूर सरोवर पक्षी विहार के एक किलोमीटर के दायरे में अब निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लग गई है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ईको सेंसटिव सेंसटिव जोन घोषित कर दिया है। मंत्रालय ने दस अक्टूबर को इसकी अधिसूचना जारी की। राज्य सरकार की ओर से दिल्ली स्थित मंत्रालय में प्रजेंटेशन दिया गया था। सूर सरोवर पक्षी विहार के पास नौ गांव बसे हुए हैं, यहां हर गतिविधि पर रोक लगा दी गई है।

जूता फैक्ट्रियों की मुश्किल

सींगना गांव में आगरा ट्रेड सेंटर और डिजाइन स्टूडियो एवं टेस्टिंग लैब बनी है। इन सेंटरों के आसपास जूता फैक्ट्रियों की स्थापना नहीं होगी। इसके अलावा इस जोन के पास कोई सड़क नहीं बनेगी।

इन पर लगेंगी रोक

-वाणिज्यिक खनन, पत्थर उत्खनन और क्रेशर इकाइयां।

-आरा मशीनों की स्थापना।

-किसी भी खतरनाक पदार्थों का उपयोग या उत्पादन।

-जल, वायु, मृदा और ध्वनि प्रदूषण करने वाले उद्योगों की स्थापना।

-तापीय और बिजली परियोजनाओं की स्थापना।

-व्यवसाय हेतु लकड़ी जलाने का उपयोग।

-ईंट भट्ठों की स्थापना।

इन पर होगा नियंत्रण

- होटल और रिजॉर्ट की स्थापना।

- बिल्डिंग निर्माण की गतिविधि।

- किसी फर्म द्वारा वाणिज्यिक पशुधन का पालन करना।

- पॉलीथिन का प्रयोग।

- विदेशी प्रजातियों की शुरुआत।

- भूजल की निकासी।

- पर्यटन से संबंधित गतिविधि जैसे विमान, गर्म हवा के गुब्बारे,

- पेड़ों की कटाई।

- विद्युत लाइन बिछाना, विद्युत टॉवर की स्थापना।

- मौजूदा सड़कों का चौड़ीकरण।

- पहाड़ी ढलानों और नदी तटों का संरक्षण।

इनको मिलेगा प्रोत्साहन

- जैविक खेती।

-बाग लगाना, जड़ी बूटियों का रोपण।

-हरित प्रौद्योगिकी को अपनाना।

-बारिश के पानी का संग्रहण।

-वृक्षारोपण और अन्य वानिकी गतिविधि।

-पर्यावरण के प्रति जागरूकता।

ये भी मुश्किल में

- रुनकता के पास टीपी नगर टू (ट्रांसपोर्ट नगर द्वितीय) एडीए का प्रस्ताव है। इसमें शहर भर के वाहन यहां पर पहुंचेंगे। खंदारी के पास टीपी नगर और यमुना किनारे के वाहनों को यहां पर शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन जोन बनने से यह भी प्रभावित होगा।

- सूर सरोवर पक्षी विहार के पास मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत पीएसी शिफ्ट करने को सर्वे जारी है। लेकिन ईको सेंसटिव जोन घोषित होने के कारण पीएसी की शिफ्टिंग नहीं होगी।

नेशनल हाईवे भी जोन के अंदर

मथुरा-फीरोजाबाद को जोडऩे वाला नेशनल हाईवे-19 भी ईको सेंसटिव जोन में आता है। इस पर चलने वाले वाहनों से प्रदूषण व ध्वनि उत्पन्न होती है। इससे पक्षियों को दिक्कत होती है। लेकिन पूर्व में बना होने के कारण हाईवे यथास्थित रहेगा।

ये हैं गांव

रुनकता, नगला मुरली, अरसेना, चौमा फराह, नगला भूपिया, सींगना, नगला रेठी, सींगना बुर्ज, गरी नहचाला।

आपत्तियां भी नहीं पहुंचीं

मंत्रालय ने ईको सेंसटिव जोन घोषित करने से पूर्व आपत्ति दर्ज कराने के लिए ग्र्रामीणों को साठ दिन का वक्त दिया था, लेकिन नौ गांवों से केवल दो से पांच आपत्तियां पहुंचीं। यही कारण रहा कि दस अक्टूबर को अधिसूचना जारी हो गई।

ये हैं निगरानी कमेटी के सदस्य

ईको सेंसटिव जोन की निगरानी के लिए कमेटी के अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट, राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी प्रोजेक्ट के उपवन संरक्षक सचिव रहेंगे। इसके अलावा सदस्य वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एनजीओ के एक प्रतिनिधि, दो विशेषज्ञ, लोक कार्य व सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता, जिला कृषि अधिकारी, वन्यजीव वार्डन इटावा, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आदि कमेटी के सदस्य होंगे।

सूर सरोवर पक्षी विहार की ईको सेंसटिव जोन की अंतिम अधिसूचना जारी हो चुकी है। 403 हेक्टेयर जमीन के बाहर चारों ओर एक किलोमीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लग गई है।

आनंद कुमार, उप वन संरक्षक, राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी प्रोजेक्ट, आगरा

 

Posted By: Tanu Gupta

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