गौरव भारद्वाज, आगरा: जागरण फिल्म फेस्टिवल जहां एक तरफ दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिश्तों में मिठास भी बढ़ा रहा है। सालों पहले एक दूसरे का हाथ थामने वाले बुजुर्ग दंपति जेएफएफ में एक दूसरे का हाथ थामे आए। उनकी नजरों के सामने स्क्रीन पर फिल्म चल रही थी, लेकिन दिमाग में पुरानी यादें रिवाइंड हो रही थीं।

शनिवार को जेएफएफ के दूसरे दिन सिने प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन इस भीड़ में कुछ ऐसे भी थे जो कुछ अलग फिल्म देखने की चाहत रखते थे। ऐसे में वह सर्व मल्टीप्लेक्स तक आए। सरलाबाग निवासी सुरेश अग्रवाल अपनी पत्‍‌नी सुशीला देवी के साथ 18 साल बाद सिनेमाघर में आए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्‍‌नी को तर्पण फिल्म देखनी थी। उन्होंने अंतिम बार साथ में बागबान फिल्म देखी थी। इतने लंबे समय बाद जब पत्‍‌नी ने फिल्म देखने की इच्छा जताई तो वह मना नहीं कर पाए। इसी तरह पुष्पांजलि बाग निवासी केके अग्निहोत्री अपनी पत्‍‌नी रेखा के साथ आए थे। उन दोनों ने भी 2006 में अंतिम बार साथ फिल्म देखी थी। यहां आकर उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई। उनका कहना था कि आमतौर पर अब जो फिल्में आ रही हैं, वो उन्हें पसंद नहीं। मगर, जेएफएफ में सामाजिक संदेश देनी वाली फिल्म दिखाई जाती हैं, इसलिए वह आए। जीवनी मंडी निवासी देवेंद्र और धन देवी की शादी 1972 में हुई। शादी के बाद 1985 में उन्होंने राम तेरी गंगा मैली फिल्म साथ देखी थी। इसके बाद सिनेमाघर में नहीं गए। 33 साल बाद जेएफएफ में उन्होंने थियेटर में कदम रखा। वह लम्हे फिल्म देखने आए थे। धन देवी ने बताया कि श्रीदेवी उनकी पसंदीदा अभिनेत्री थीं। तब फिल्म देखने का मौका नहीं मिला, लेकिन अब फिल्म देखकर वह बहुत खुश थीं।

Posted By: Jagran