अमित दीक्षित, आगरा : जैतपुरकलां निवासी श्यामवती पत्नी राम सनेही का एक माह पूर्व निधन हो गया था। निर्वाचन कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी गई। 31 जनवरी को मतदाता सूची जारी हुई तो श्यामवती देवी का नाम सूची में देख परिजन चौंक गए। इसके उलट एक साल पूर्व मंटोला निवासी मोहम्मद इस्लाम ने फॉर्म-छह भरा था। उनके सहित परिवार के तीन सदस्यों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है। 

शाहगंज निवासी किशन कुमार का दो माह पूर्व निधन हो गया। परिवार में पत्नी सुमन व दो बेटे हैं। मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान उनके घर पर कोई भी नहीं पहुंचा। जिससे लिस्ट से उनका नाम नहीं हटा। इसकी शिकायत बेटे धीरज ने एसडीएम से की। उधर, इसी क्षेत्र के विक्रम कुमार ऐसे हैं। जिन्होंने आठ माह पूर्व लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म भरा था। अभी तक उनका नाम लिस्ट में शामिल नहीं हुआ है। 

मतदाता सूची में मृतकों के शामिल होने के यह तो दो ही उदाहरण नहीं हैं। जिले में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं। जिनके निधन को एक माह से लेकर डेढ़ साल तक हो चुका है, लेकिन जनवरी में चले अभियान में इनके नाम सूची से हटाए नहीं गए हैं। यह स्थिति तब है जब राज्य निर्वाचन आयोग लगातार सूची को त्रुटि रहित बनाने पर जोर दे रहा है। कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने प्रियजन के निधन की जानकारी ब्लॉक व तहसील में दी। हालांकि कुछ ने नहीं दी। उधर, बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं। जो कई बार फॉर्म- छह भरकर मतदाता सेवा केंद्र में जमा कर चुके हैं। इसके बाद भी इनके नाम शामिल नहीं हुए हैं। 

घर-घर जाकर नहीं किया सर्वे 

मतदाता सूची के सत्यापन के लिए 3778 बीएलओ लगाए गए थे। बड़ी संख्या में बीएलओ ने घर-घर जाकर सर्वे नहीं किया। कुछ ने तो प्राइवेट कर्मचारी से सर्वे कराया। सत्यापन में लापरवाही के चलते त्रुटियां दूर नहीं हो सकीं। 

33 लाख हैं वोटर 

जिले में 33 लाख वोटर हैं। 18 लाख पुरुष और 13 लाख महिला वोटर शामिल हैं। 

क्‍या कहते हैं अधिकारी

मतदाता सूची में मृतकों के नाम शामिल होने की शिकायतें मिली हैं। जबकि कुछ ऐसे लोग हैं। जिनके नाम नहीं जुड़े हैं। 

- एनजी रवि कुमार, डीएम 

Posted By: Prateek Gupta

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