आगरा, प्रभजोत कौर। डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी से नए साल में छात्र किताबें आनलाइन इश्यू करा सकेंगे। किताबों के डिजिटलाइजेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। विश्वविद्यालय ने बीते दिनों 1.75 करोड़ किताबें अपलोड की थीं।

केंद्रीय पुस्तकालय में वर्तमान में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों को मिलाकर लगभग 2000 सदस्य पंजीकृत हैं। नए सत्र में सदस्यता बढ़ेगी। केंद्रीय पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1927 में हुई। वर्तमान में स्थापित केंद्रीय पुस्तकालय के भवन के निर्माण की आधारशिला सात मार्च 1952 में रखी गई। पुस्तकालय में 200 वर्षों से अधिक पुरानी पाठ्य पुस्तकें, 70 वर्ष पुराने के विश्वकोश, शब्दकोश और अन्य विषय आधारित पाठ्यपुस्तकों का संग्रह है।

20 साल पहले मिला था साफ्टवेयर

विश्वविद्यालय को लाइब्रेरी के लिए 20 साल पहले यूजीसी से आटोमेशन के लिए सोल नामक साफ्टवेयर मिला था, इस साफ्टवेयर का इस्तेमाल अब तक नहीं हुआ था। कोरोना काल से पहले लाइब्रेरी आटोमेशन का काम शुरू हो चुका था। नए साल में किताबें ऑनलाइन इश्यू होंगी। उसके बाद किताबें इश्यू कराने के लिए कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब तक छात्रों को जानकारी नहीं हो पाती थी लाइब्रेरी में कौन सी किताबें उपलब्ध हैं, किसने इश्यू कराई हैं, कब वापस आएगी। आटोमेशन के बाद यह समस्याएं खत्म हो जाएंगी। छात्र आनलाइन ही यह जानकारी ले पाएंगे। लाइब्रेरी में दो लाख से ज्यादा किताबें हैं। जो किताबें कापी राइट नियम मुक्त हैं, उन्हें डिजिटल रूप में किया जाएगा।

शुरू हो चुकी है साइबर लाइब्रेरी

साइबर लाइब्रेरी में 3000 से ज्यादा ई रिसर्च जर्नल उपलब्ध हैं। दुनिया की चर्चित आनलाइन लाइब्रेरी 'इनफिलिबनेट' और 'शोधगंगा' जैसी लाइब्रेरी से जोड़ गया है। विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर हर विषय के लिए सब्जेक्ट गेटवे भी बनाया है, यहां जाकर मनचाही पाठ्य सामग्री का आनलाइन अध्ययन किया जा सकता है। संपर्क न्यूज क्लिपिग लिंक में दुनिया भर के 2500 अखबार, 4500 पत्रिकाएं उपलब्ध हैं। जेनोडो लिंक में विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के जर्नल पढ़े जा सकते हैं, जिसे सर्न द्वारा तैयार किया गया है। सेंट्रल लाइब्रेरी को 2017 में विश्वविद्यालय की वेबसाइट से जोड़ा गया था। साइबर लाइब्रेरी में पूरी दुनिया की 1.75 करोड़ किताबों को अपलोड किया जा चुका है।

किताबों के डिजिटलाइजेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है, अगले साल से किताबें आनलाइन इश्यू की जाएंगी। नई तकनीक को भी इसमें जोड़ा जा रहा है।

- मो. अरशद, लाइब्रेरियन

Edited By: Prateek Gupta